social satire
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विचार मंथन
ज्वैलरी-सैलरी से गैलरी तक
एक वह दौर था जब घर की दादी-नानी अपनी सबसे कीमती पूंजी- सोने की चैन-झुमके और चांदी के सिक्के आदि…
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विचार मंथन
दास मलूका कह गए सबके दाता राम
सुबह-सुबह मैंने देखा वह घर के सामने पुलिए पर बैठा बीड़ी फूंक रहा था। यह तो बढ़ई दुर्गाप्रसाद है। मुझे…
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विचार मंथन
गोली और होली के बीच झूलती दुनिया
तलवार उठाना तो बहुत आसान है लेकिन उसे म्यान में रखने के लिये साहस चाहिये और ऐसा करने का साहस…
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विचार मंथन
वेल्डिंग या वेडिंग
माली रामदयाल कार्ड देते हुये बोला- मेरे भाई की वेल्डिंग है। मैंने हैरानी से पूछा- वेल्डिंग? ये क्या है भाई?…
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विचार मंथन
दरोगा जी … चोरी हो गई
वह चिल्ला रहा था – चोर चोर चोर चोर…। कौन है चोर ? वही, जिसने मेरा सब कुछ चोरी कर…
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मजाक
शादी के बाद : घर या बार!
सुरेश : शादीशुदा आदमी के लिए घर बार ही सब कुछ होता है। रमेश : वो कैसे ? सुरेश :…
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विचार मंथन
चूहा बिल में – आदमी चाल में
जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि भारतीय संस्कृति में चूहा केवल कुतरने वाला प्राणी नहीं है। वह गणपति…
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तेलंगाना
कैप्टन अहमद का हिंदी नाटक संग्रह दस पैसे का पोस्टकार्ड लोकार्पित
हैदराबाद, विज्ञापन एवं ब्रांडिंग व्यवसायी तथा पूर्व सेनाकर्मी कैप्टन एस.एन. अहमद का हिंदी नाटक संग्रह ‘दस पैसे का पोस्टकार्ड’ आज…
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