दास मलूका कह गए सबके दाता राम

सुबह-सुबह मैंने देखा वह घर के सामने पुलिए पर बैठा बीड़ी फूंक रहा था। यह तो बढ़ई दुर्गाप्रसाद है। मुझे देखा तो मुस्कुरा दिया। भाई! काम-धंधे पे क्यों नहीं जाते? अच्छे-खासे हट्टे-कट्टे हो। बढ़ई का काम जानते हो न? हां, मैं वह काम जानता हूं, लेकिन आजकल काम पर जाने का मन ही नहीं करता। बस घर पे बीवी-बच्चों के साथ पड़ा रहता हूं। घर कैसे चलता है?
बढ़िया चलता है। कोनो फिकर नहीं।

मेरा मतलब खाना-पीना, कपड़े-लत्ते, घर-मकान यह सब तो होना ही चाहिए न? बस सरकार की कृपा है। घर में छ जने हैं। सरकार भरपूर राशन मुफ्त में देती है। मेरे माता-पिता को पेंशन मिलती है। पत्नी को भी बिना ब्याज बड़ी रकम देती है सरकार। उसे ब्याज पे चलाकर पैसे आ जाते हैं। मैं तो बस जब मन हुआ काम पे जाता हूं। पैसे मिल जाते हैं। ऐसा कब तक चलेगा?

जब तक चले चल जाए। तन-बदन अलसा गया है, जबसे यह मुफ्त का राशन मिल रहा है। का जरूरत है हाथ गोड चलाने की? अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम। दास मलूका कह गये सबके दाता राम। मतलब तुम सोचते हो, ऐसे ही जिंदगी चल जाएगी? काहे नहीं चलेगी? पिछले कुछ सालों से चल रहा है बढ़िया। इसलिए आप उन्हीं को वोट देते हो, जो मुफ्त की रेवड़ियां बांटते हैं?

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वोट के बदले मिलने वाले लाभों पर निर्भरता की मानसिकता

और नहीं तो क्या? वोट देने का कोई तो फायदा हो। वोट देते समय थोड़ा-बहुत फायदा मिलता है, बिरयानी, बीयर, साड़ियां, कुछ हजार रुपये और बाद में मिले राशन, पानी, पेंशन, बिना ब्याज बड़ी रकम ने हमारी जिंदगी को सुभीता दी है। हम हमेशा उन्हीं को वोट देंगे और ऐसे ही जिएंगे। मतलब आलसी, निकम्मे और बेरोजगारी में ज़िंदगी गुजार दोगे। बाद में बच्चों का भविष्य क्या होगा?

डॉ.टी.महादेव राव
डॉ.टी.महादेव राव

वैसा ही होगा, जैसे मैं गुजार रहा हूं। हमारा आने वाला कल भी इन्हीं फोकट की रेवड़ियों पर खड़ा है। क्या परेशानी है? परेशानी क्या होगी? कल को यह सब बंद हो जायेगा तो क्या करोगे? कैसे बंद हो जायेगा। सरकार है, उसकी योजना है तो काहे बंद होगी? सुप्रीम कोर्ट ने इसके बारे में जानकारी ली है, कहा यह गलत है, इसे बंद करना चाहिए। ऐसे में बंद होगा कि नहीं? ऐसे में हम सब गरीब-गुरबा सुप्रीम कोर्ट के आगे धरना देंगे और रेवड़ियां हासिल करते रहेंगे। आखिर हमारी भी कोई इज्जत है, खुद्दारी है। न.. यह न इज्जत है न खुद्दारी है, यह तो फ़ुकट का चंदन घिसने की बीमारी है।

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