राज्यों का हिस्सा घटाने की बात गलत : सीतारमण

नई दिल्ली, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को केंद्र से उनकी कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं होने संबंधी कुछ विपक्षी सांसदों के आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि सरकार ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।

सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि सरकार ने बजट में पाँच मेडिकल क्लस्टर, पाँच मेगा औद्योगिक पार्क, बुजुर्गों के देखभाल के लिए पेशेवरों को तैयार करने जैसी कई घोषणाएं की हैं, जिनसे लाखों रोजगारों का सृजन होगा।

मंत्री ने कहा कि हम पर आरोप लगता है कि हम राज्यों की 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं करते। मैं सदन के माध्यम से आश्वासन देती हूँ कि हमने केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है। वित्त मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 तक राज्यों की कर हिस्सेदारी का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि केंद्र से राज्यों को मिलने वाला यह धन आयोग की सिफारिश से पूरी तरह मेल खाता है और इसमें कोई कमी नहीं की गई है।

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अगले वित्त वर्ष में 25.44 लाख करोड़ कर हस्तांतरण अनुमान

मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कुल कर हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में 2.07 लाख करोड़ रुपये अधिक होगा। सीतारमण ने कहा कि संविधान ने केंद्र को उपकर और अधिशेष लगाने का अधिकार दिया है और विभाज्य पूल में वह शामिल नहीं होता है, इसलिए राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी की बात करते समय उपकर और अधिशेष संबंधी आरोप अनुचित हैं।

मंत्री ने कहा कि केंद्र जो उपकर वसूलता है उसमें से भी राज्यों को अस्पताल, स्कूल और सड़क आदि के निर्माण के लिए सहायता देता है। सीतारमण ने कहा कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया है, जो 31 मार्च को समाप्त हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है।

संशोधित अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष का बजट 49.64 लाख करोड़ रुपये है, जो फरवरी, 2025 में अनुमानित 50.65 लाख करोड़ रुपये से कम है। वित्त वर्ष 2024-25 का बजट 46.52 लाख करोड़ रुपये का था। वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कर राजस्व से कहीं अधिक है। सरकार का लक्ष्य 44.04 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त करना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है।

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