तेलंगाना हाईकोर्ट : तालाबों के संरक्षण की कार्रवाई का विवरण तलब
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने तालाबों के संरक्षण को लेकर की जा रही कार्रवाई का विवरण न देने पर राज्य सरकार के प्रति कड़ा असंतोष जताया। अदालत ने सवाल किया कि तालाबों के संरक्षण के लिए की जा रही कार्रवाई का विवरण देने के लिए सरकार के पास समय नहीं है। एचएमडीए की परिधि में तालाबों के एफटीएल के निर्धारण, अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई का विवरण देने के लिए हर बार सरकार टालती जा रही है।
सरकार के इस रवैये पर कड़ा असंतोष जताते हुए अदालत ने इस मामले पर पूर्ण विवरण के साथ प्रतियाचिका दायर करने का आखिरी अवसर देने की बात कही और यह भी स्पष्ट किया कि दो सप्ताह के भीतर प्रतियाचिका दायर नहीं की गई, तो पाँच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने की राशि राज्य न्याय सेवा अधिकार संस्था के पास जमा करना पड़ सकता है। अदालत ने पुनः चेतावनी देते हुए कहा कि प्रतियाचिका दायर करने का यह अंतिम अवसर है और प्रतियाचिका दायर होने के पश्चात याचिकाकर्ता को जवाबी याचिका दायर करने के आदेश दिए।
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तालाबों के एफटीएल निर्धारण और संरक्षण में कार्रवाई का अभाव
दोनों पक्षों को लिखित रूप में अपनी दलील पेश करने के आदेश देते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। इस संबंध में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने मंगलवार को आदेश जारी किए। रायदुर्गम के मलकम चेरुवु, कूकटपल्ली के हैदरगुड़ा में किंदीकुंटा, संगारेड्डी में अमीनपुर तालाब, उप्पल के रामंतापुर में चिन्ना चेरुवु आदि तालाबों के एफटीएल निर्धारण, तालाबों के संरक्षण की कार्रवाई के अभाव के चलते व्यर्थ पदार्थ, कचरा आदि न केवल तालाबों में फेंका जा रहा है, बल्कि तालाब के आस-पास निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
तालाबों के सौन्दर्यीकरण के नाम पर निजी संस्थाओं को अनुमति देने के मामलों पर दायर याचिकाओं पर खण्डपीठ ने पुनः एक बार सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने प्रतियाचिका दायर करने के लिए मामले की सुनवाई दो सप्ताह तक स्थगित करने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मलकम चेरुवु पर इसके पूर्व दायर याचिका को लेकर प्रतियाचिका से संबंधित तथ्य इस मामले पर भी लागू होते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि सरकार प्रतियाचिका दायर करने के लिए समय देने का आग्रह कर इसे टालती जा रही है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रतियाचिका दायर करने के लिए पुनः समय माँगना उचित नहीं है। खण्डपीठ ने कहा कि प्रतियाचिका दायर करने के लिए यह अंतिम अवसर है। दो सप्ताह के भीतर प्रतियाचिका दायर न करने पर राज्य सरकार को पाँच हजार रुपये की जुर्माना राशि राज्य न्याय सेवा अधिकार संस्था में जमा कराने के आदेश दिए। इस आदेश के साथ मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
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