गोल्डन टेंपल पर हमले की हिमाकत पाकिस्तान के लिए डेथ वॉरेंट होती!
अगर दुर्भाग्य से पाकिस्तान की यह हरकत कामयाब हो गई होती, तो पाकिस्तान का अस्तित्व मिट ही जाता, इसके जरिये दुनिया की भी भारी तबाही होती। हिंदुस्तान में भी लाखों लोग इस युद्ध की बलि चढ़ते और ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर इस युद्ध के चलते तहस-नहस हो जाता। इसलिए भारतीय सेनाओं ने गोल्डन टेंपल को पाकिस्तान की नापाक हरकत वाले हमले से बचाकर एक तरह से उसका अस्तित्व, उसे भीख में दे दिया है। लेकिन पाकिस्तान को अब कभी दोबारा ऐसी हरकत के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। नहीं तो पाकिस्तान का धरती के नक्शे से हमेशा-हमेशा के लिए अस्तित्व ही मिट जायेगा।
सोमवार को अमृतसर में 15 इन्फ्रेंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर, कमांडिंग मेजर जनरल कार्तिक सी.शेषाद्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि 7 मई 2025 को जब पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा हमला किया गया, तो पाकिस्तान ने जवाबी कार्यवाई के चलते कामिकेज़ ड्रोन, सतह से सतह और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के जरिये भारत के कई वायु सेना ठिकानों पर हमला किया, लेकिन सेना ने जब ये सारे हमले नाकाम कर दिये, तो खुन्नस में पाकिस्तान ने गोल्डन टेंपल तथा कई अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया।
लेकिन सेना को पहले से ही उसकी इस हरकत का अनुमान था। इसलिए गोल्डन टेंपल की पहले से ही विशेष सुरक्षा की गई थी, जिस कारण पाकिस्तान का यह आत्मघाती हमला बेकार हो गया। लेकिन अगर पाकिस्तान गोल्डन टेंपल पर हमला करने की हिमाकत पर सफल रहता, तो एक तरह से अपने अस्तित्व के डेथ वॉरेंट पर साइन कर लेता। दरअसल गोल्डन टेंपल सिक्ख धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल तो है ही, पर यह सारे देश को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाला स्थान भी है। हिंदुस्तान का हर मजहबी गोल्डन टेंपल से अथाह प्यार करता है।
यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं, जो इस बात का सबूत है। इन श्रद्धालुओं में सिक्ख मुश्किल से 10 फीसदी होते हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गोल्डन टेंपल के प्रति इस देश के लोगों में कितना प्यार और कितनी श्रद्धा है। गोल्डन टेंपल केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, यह भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता और भारतीय विविधता का प्रतीक है। इस पर हमला करना सीधे भारत की आत्मा पर हमला करना होगा। अगर पाकिस्तान यह दुष्टता करने में सफल रहता, तो पूरे भारत में जनभावनाएं उबाल में आ जातीं।
गोल्डन टेंपल पर हमला देश और विश्व के लिए बड़ा संकट
देश के हर व्यक्ति में आक्रोश की भारी लहर फैल जाती। अमृतसर और पंजाब के दूसरे शहरों में जबर्दस्त जनआंदोलन खड़ा हो जाता और भारत सरकार के पास पाकिस्तान पर पूर्ण परमाणु हमला करने के अलावा शायद ही कोई और विकल्प बचता। अगर पाकिस्तान इस हरकत पर सफल रहता, तो रातोंरात देशभर में लोग घरों से बाहर निकल आते और संसद में भी तुरंत आपातकालीन बैठक बुलायी जाती।
इस बैठक में देश के सभी क्षेत्रों और पार्टियों के सांसद एकमत से पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा डालने की बात करते और तब भारतीय प्रधानमंत्री को बिना दुनिया के बड़े मुल्कों और संगठनों की सलाहों पर ध्यान दिए, पाकिस्तान पर हमला करना ही होता। भारत की सैन्य रणनीति में भले परमाणु हथियारों को लेकर नो फर्स्ट यूज की रणनीति अपनायी जाती है, लेकिन इस मामले के बाद इस रणनीति का कोई अर्थ नहीं रह जाता। भारत तुरंत पाकिस्तान को परमाणु हमले से करारा जवाब देता।
इसलिए पाकिस्तान अगर सौभाग्य से इस बार अपनी ये हरकत करने के बाद भी अस्तित्व को बचा ले गया है, तो उससे उम्मीद यही की जा सकती है कि वह इसकी संवदेनशीलता को समझेगा और गोल्डन टेंपल पर कभी दुबारा हमले की नहीं सोचेगा। गोल्डन टेंपल महज एक धार्मिक स्थान नहीं है, यह आइडिया ऑफ इंडिया का प्रतीक है। भारतीय वायु सेना पाकिस्तान की इस नापाक हरकत के बाद पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को मिसाइल हमलों से पाट देते।
पाकिस्तान की हरकत पर सिक्ख समुदाय और विश्व प्रतिक्रिया
नियंत्रणरेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा दोनों ही जगह पर भीषण युद्ध शुरु हो जाता। पाकिस्तान की तरफ स्थित लाहौर, सियालकोट और बहावलपुर जैसे संवदेनशील और ऐतिहासिक शहर देखते ही देखते भारतीय हमलों से तहस-नहस हो जाते। गोल्डन टेंपल पर पाकिस्तान की नापाक हरकत के बाद निश्चित रूप से लाखों लोग पंजाब बॉर्डर से देश के अंदर की तरफ बसाये जाते और बॉर्डर को खाली करके भारत पाकिस्तान के धुर्रे बिखेर देता। हर जगह पाकिस्तान के पंजाब बॉर्डर पर सिर्फ सेना के जवान नजर आते।
निसंदेह पाकिस्तान की इस हरकत से सिक्ख समुदाय में एक बेहद तीव्र और विशेष प्रक्रिया होती। बहुत बड़ी तादाद में सिक्ख युवक सेना में सिर्फ इसलिए शामिल होते कि पाकिस्तान को हर हाल में सबक सिखाना है। सिक्ख धार्मिक स्थल इसे विशेष धर्म युद्ध कह सकते थे, जिससे पूरे भारत में हिंदू और सिक्खों के बीच पाकिस्तान को लेकर उन्माद छा जाता और फिर किसी के रोके भी पाकिस्तान का अस्तित्व नहीं बचता। इसकी वैश्विक प्रतिािढया भी बहुत खतरनाक होती।
क्योंकि दुनिया के सभी प्रमुख देशों में चाहे वह अमेरिका हो, कनाडा हो, फ्रांस हो, इंग्लैंड हो, बड़ी तादाद में सिक्ख बसे हुए हैं और ये सिक्ख सिर्फ संख्याभर नहीं हैं बल्कि विशेष प्रभाव रखने वाले नागरिक हैं। इस कारण पूरी दुनिया से पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठती और पाकिस्तान को अपना साथ देने के लिए दुनिया का शायद ही कोई देश मिलता।
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पाकिस्तान की हरकत पर वैश्विक निंदा और अस्तित्व संकट
इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोर निंदा तो होती ही, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र जैसे ताकतवर संगठन पाकिस्तान की जमकर लानत-मलानत करते और इसे दुनिया के लिए सबसे खतरनाक आतंकवादी देश घोषित करने में जरा भी देर नहीं लगती। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान का अपने को दोस्त कहने वाला चीन भी उसकी किसी तरह की मदद नहीं कर पाता।
क्योंकि उसकी इस हरकत से चीन एक साथ पूरी दुनिया को अपने खिलाफ नहीं खड़ा कर सकता था। पाकिस्तान को शायद ही ऐसी स्थिति में कोई देश सैन्य या आर्थिक सहायता देता और पहले से ही दर दर को भटक रहा पाकिस्तान का गरीबी और भुखमरी से ही अस्तित्व खत्म हो जाता। कुल मिलाकर अगर दुर्भाग्य से पाकिस्तान की यह हरकत कामयाब हो गई होती, तो पाकिस्तान को अस्तित्व मिट ही जाता, इसके जरिये दुनिया की भी भारी तबाही होती।

हिंदुस्तान में भी लाखों लोग इस युद्ध की बलि चढ़ते और ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर इस युद्ध के चलते तहस-नहस हो जाता। इसलिए भारतीय सेनाओं ने गोल्डन टेंपल पर पाकिस्तान की नापाक हरकत वाले हमले से बचाकर एक तरह से उसका अस्तित्व, उसे भीख में दे दिया है। लेकिन पाकिस्तान को अब कभी दोबारा ऐसी हरकत के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। नहीं तो पाकिस्तान का धरती के नक्शे से हमेशा-हमेशा के लिए अस्तित्व मिट जायेगा।
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