भू-अधिग्रहण अधिकारी के रवैये से अदालत नाराज

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे के भुगतान में लापरवाही बरतने के लिए राजन्ना सिरसिल्ला ज़िला इकाई-7 के भू-अधिग्रहण अधिकारी और विशेष उप-ज़िलाधीश के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने प्रश्न उठाया कि भूमि अधिग्रहण मुआवजा न चुकाने के बावजूद अधिकारी पूर्व आदेशानुसार अदालत की सुनवाई में क्यों उपस्थित नहीं हुए।

अदालत ने आदेश दिया कि आगामी 6 मई को मामले की सुनवाई में उन्हें उपस्थित होना होगा। इस संबंध में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने आदेश जारी किए। वह जगिनापल्ली मंगम्मा और दो अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि तंगलापल्ली मंडल के चेर्लावांचा गाँव में एक मकान के संबंध में गत 18 अप्रैल, 2023 को घोषित भू-अधिग्रहण अवार्ड के अनुसार 19.05 लाख रुपये का मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया। हालाँकि 21 मार्च, 2026 को ब्याज सहित मुआवजे की राशि के भुगतान की माँग करते हुए एक नोटिस जारी की गई, लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा इसे स्वीकार न करना प्राकृतिक कानून के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने उचित मुआवजे के भुगतान के लिए आदेश देने की माँग की।

15% ब्याज सहित मुआवजे की मांग

अधिवक्ता ने दावा किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के पुनर्वास और बहाली (आरआर पैकेज) के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित मुआवजे का भुगतान करने तथा अधिनियम 64 के तहत मुआवजे में वृद्धि के लिए आदेश जारी करने की माँग की। सरकारी अधिवक्ता ने आग्रह किया कि संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाए, क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री के साथ बैठक में भाग लेना था।

हालाँकि याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अधिकारी जान-बूझकर नोटिस प्राप्त करने से बच रहे थे। इन तर्कों पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया और अधिकारी को सुनवाई में उपस्थित होने से छूट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकारी को छूट नहीं दी जाएगी और उन्हें अगली सुनवाई में उपस्थित होना ही होगा।

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अदालत ने याद दिलाया कि जनता की समस्याओं को स्वीकार करना और उना समाधान करना सरकारी अधिकारियों का दायित्व है। अदालत ने सवाल किया कि सार्वजनिक धन से वेतन पाने वाले अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन किए बिना अदालत में उपस्थित होने से कैसे बच सकते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं के अनुरोधों को अस्वीकार करना चिंता का विषय है। अदालत ने संबंधित भू-अधिग्रहण अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। साथ ही मामले की सुनवाई 6 मई तक के लिए स्थगित कर दी।

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