जिन पहचानों से मजबूत होती है भारतीय गणराज्य की कहानी

गणतंत्र दिवस वह दिन है, जब भारत ने कहा था, अब देश को चलाने की शक्ति किसी राजा, किसी साम्राज्य या किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि क़ानून, संविधान और नागरिकों की होगी। यही वह क्षण था, जब भारत सिर्फ एक आज़ाद देश नहीं रहा बल्कि एक गणराज्य बना- जहां राष्ट्र का मुखिया जनता की इच्छा से चुना जाता है और देश का शासन संविधान के मुताबिक चलता है।
वह पहली सुबह जब हम गणराज्य बने
26 जनवरी 1950 को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, ऐक्ट 1935 जैसी औपनिवेशिक व्यवस्था से भारत ने निर्णायक विदाई ली। भारत के आत्मशासन की औपचारिक मोहर लगी। भारत सार्वभौमिक लोकतांत्रिक गणराज्य बना। बाद के दिनों में इस शब्द में सोशलिस्ट और सेकुलर जैसे शब्द भी जुड़े और इस तरह फिर एक-एक करके वो सभी पहचानें बनती गईं, जिनसे गणराज्य मजबूत होता गया।
इन पहचानों में प्रमुख हैं-
संविधान – यह देश का सबसे बड़ा अनुबंध है।
मौलिक अधिकार– यह भारतीय नागरिक के आत्मसम्मान की ढाल है।
मौलिक कर्तव्य – यह देश के सभी नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय प्रतीक – यह हमारी एकता की दृश्य भाषा है।
संस्थाएँ – यह हमारे लोकतंत्र की रीढ़ हैं और इनमें शामिल हैं – न्याय पालिका, संसद और चुनाव आयोग।
भारतीय संविधान
भारत का संविधान दुनिया का सबसे विस्तृत और व्यवस्थित संविधान है। इसे बनाने में करीब दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे थे। संविधान सभा में विचार विमर्श हुआ, तर्क हुए, बहसें हुई, कई बार मतभेद हुए। लेकिन यह स्पष्ट था भारत जैसा विविध देश, तभी टिकेगा, जब उसे नियम और न्याय एक सूत्र में बांधेंगे। गणतंत्र में नेता बदल सकते हैं, सरकारें बदल सकती हैं, पर क़ानून की बुनियाद स्थिर रहती हैं। इसी से मजबूत होती है राष्ट्र की पहचान।

हमारी विभिन्न पहचानें
26 जनवरी को लोग तिरंगा फहराना प्रतीक है, लेकिन असली गणतंत्र तब दिखता है-
- जब हममें से हर किसी को समान अवसर मिले।
- किसी को न्याय पाने में डर न लगे।
- देश के हर गरीब व्यक्ति की आवाज सिस्टम तक पहुँच सके।
- किसी महिला का सम्मान सड़कों, दफ्तरों और घरों में सुरक्षित रहे।
- किसी छात्र को पहचान, भाषा या धर्म के कारण नीचा न दिखाया जाए।
भारत की असली ताकत बहुलता में है। अनेक भाषाएं, अनेक पहनावे, अनेक तरह के खानपान, अनेक तरह की पूजा-पद्धतियों वाले हमारे गणराज्य की कहानी दरअसल, विविधता में एकता की कहानी है।
गणतंत्र परेड का संदेश
गणतंत्र दिवस परेड देश की क्षमता और विविधता का प्रदर्शन है। हमारी रक्षा क्षमता बताती है कि देश सुरक्षित है। हमारी सांस्कृतिक झांकियां दर्शाती हैं कि हम विविध संस्कृतियों का साझा देश हैं। वीरता पुरस्कार बताते हैं कि देश में साहस का सम्मान होता है और स्कूलों की एनसीसी कैडर बताती है कि देश भविष्य के नागरिक तैयार कर रहा है। देश कमजोर नहीं है और भारत बटा हुआ नहीं है।

गणतंत्र : हर दिन का उत्सव
गणतंत्र दिवस असल में नागरिकों की विशिष्टता का दिन है। ऐसे में अगर हर व्यक्ति अपने इर्दगिर्द नियमों का पालन करता है। सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करता है। टैक्स ईमानदारी से देता है। वोट समझदारी से डालता है। घृणा की बजाय संवाद चुनता है, तो इन खूबियों से न सिर्फ देश मजबूत होता है बल्कि गणतंत्र गर्वित होता है। जब नागरिक यह मानते हैं कि मेरी पहचान भारतीयता है और मेरा अधिकार भारत के संविधान से आता है, तब हमारा यह गणतंत्र किसी शख्स का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक आत्मा का देश बन जाता है।
तिरंगे का संदेश
26 जनवरी की शाम जब परेड खत्म हो जाती है, तब भी तिरंगा हवा में होता है। वो बताता है कि गणतंत्र हमारे हर दिन की जिम्मेदारी है। भारत की गणराज्य कथा करोड़ों-करोड़ लोगों के साझे जीवन की कहानी है। हमें जो बात मजबूत बनाती है, वह यह है- हम नागरिक हैं और यह देश हमारा संविधान शासित गणराज्य है।

गणराज्य का आखिर मतलब क्या है?
गणराज्य यानी ऐसा देश जहाँ का राष्ट्र प्रमुख वंशानुगत राजा नहीं बल्कि जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि होता है। भारत में यह पद राष्ट्रपति का है। गणराज्य के शासन का आधार कोई व्यक्ति नहीं बल्कि संविधान और क़ानून होता है।
भारतीय गणराज्य की 7 सबसे बड़ी पहचानें
- संविधान- जो हमारे लोकतंत्र का मूल आधार है।
- लोकतांत्रिक चुनाव- जिससे जनता की सत्ता स्थापित होती है।
- न्याय पालिका- जिससे आम भारतीयों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
- राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र गान- यह हमारी एकता के प्रतीक चिन्ह हैं।
- मौलिक अधिकार- यह भारतीय नागरिक की गरिमा की गारंटी है।
- मौलिक कर्त्तव्य- यह हम नागरिकों को जिम्मेदारी की याद दिलाता है।
- एकता में विविधता- यह भारत की सबसे अनोखी और मजबूत पहचान है।
-लोकमित्र गौतम
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