बातें बहुत हैं बातचीत नहीं

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जगजीत सिंह की गाई एक गजल है- बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। पर अब बातचीत और गपबाजी तो दूर की चीज है। गपोड़संखी तो अब रहे ही नहीं। वह भी समय था जब मिलते ही कहा करते थे और सुना भाई। इन दिनों बातचीत ऐसी गायब है जैसे गांव से पुराना कुआं। और फिर आजकल आपस में बातें नहीं होती बल्कि सीधे फॉरवर्ड हो जाती हैं। पहले जब बात निकलती थी तो चौपाल तक जाती थी, रास्ते में दो-चार दिलों को छूती थी, किसी का दर्द हल्का करती थी, किसी की हंसी बढ़ा देती थी पर अब बात निकलते ही ग्रुप में गिरती है और वहां से सीन बॉय 72 होकर मर जाती है।

पहले बात में वजन होता था। कुछ बातें मन हल्का-फुल्का करतीं तो कुछ इतनी भारी कि आदमी रात भर करवट बदलता रहता था। क्या बातों का भी कोई तराजू होता है? अब तो इंसान इतना हल्का हो गया है कि उसकी बात का वजन ही खत्म हो गया है। बातों में न ठहराव रहा, न असर और न ही जिम्मेदारी। अब आप डोनल्ड ट्रंप की बयानबाजी ही देख लो। बातें ऐसी जैसे पटाखे, तेज आवाज, बड़ा धमाका पर धुआं छंटते ही कुछ हाथ नहीं आता।

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मोबाइल ने खत्म की साथ बैठकर बातचीत की परंपरा

एक निकट संबंधी की मौत पर हम शेक प्रकट करने गये तो उनकी पत्नी बोली- चुपचाप चले गये और कोई बात भी नहीं की। मुझे लगा कि अब तो सबने चुपचाप ही जाना है। बातचीत तो रही ही नहीं। सबके मुंह पर ताले हैं। और गांठ बांधने लायक बात यह है कि चाहे घर हो या दुनिया, बात बंद तो रिश्ते बंद। पहले रोटी के साथ बात भी परोसी जाती थी। अब प्लेट में खाना है और साथ में मोबाइल। जैसे बिना मोबाइल के खाना हजम ही ना होगा। रोटी ठंडी हो जाए तो गरम कर ली जाती है पर रिश्ते ठंडे हो जाएं तो कौन गरम करेगा?

एक दोस्त ने दूसरे से पूछा – बीवी से झगड़ा खत्म हुआ क्या? दूसरा दोस्त सीना चौड़ा करते हुये बोला- हां हो गया, वो ही घुटनों के बल चलकर आई थी मेरे पास। दोस्त ने पूछा-वो क्या बोली? जवाब मिला कि- पलंग के नीचे से निकल जाओ, अब नहीं मारूंगी। यही हालत ईरान-अमेरिका की बातचीत की है। पहले के दिन याद करो। चार आदमी बैठते थे तो हंसी की आवाज़ गली पार सुनाई दे जाती थी। अब चार आदमी बैठें हों तो चारों के मुंह नीचे, जैसे कोई मातम चल रहा हो। एक बर की बात है अक शहर म्हं रहण आली छोरी का ब्याह गांम म्हं होग्या। बहू के लक्खण देखकै उसकी सास रामप्यारी बोल्ली- के जमाना है? बहू बोल्ली- दही जमा लेना, मैं तो ऑनलाइन शॉपिंग म्हं बिजी हूं।

शमीम शर्मा

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