नए भोर का संकल्प
नव वर्ष के नव भोर में
प्रस्थान करेंगी नीलाभ आंखें
अग्नि शिखा को अपने हृदय में समाधि कर
धरती देखेगी एक नव शांति को
शांति की लहर को देख
पंखों से फड़फड़ाएगा पंछी का झुंड
नवगीत की नवधारा बनकर
आकाश की ओर प्रस्थान करेगा
शीत की ठिठुरन में
एक धूप का टुकड़ा तुम्हारी दहलीज पर
गुनगुनाएगा नववर्ष के नव गीतों से
तुम देख सकते हो तो देखो
अपनी नीलाभ आंखों से
समय के द्वार पर खड़ा है नव वर्ष
तुम्हारे हृदय को छूकर धैर्य दे रहा है
और कह रहा है- सपने देखने का
अधिकार मत छोड़ो इस नव वर्ष में
वह तुम्हारे जीवन का मौलिक अधिकार है
आगे देखोगे तो अनगिनत संभावनाएं
पीछे देखोगे तो अतीत में अंधेरा
नव वर्ष तुम्हारे लिए एक कोरा कागज है
तुम भर सकते हो सपनों के मेघों को
कुछ चीजें अधूरी ही रह जाएंगी
बीते हुए वर्षों से लेकर नव वर्ष तक
वे प्रश्न भी करेंगे कि
क्या तुम मुझसे प्रेम नहीं करोगे?
अनेक हादसों से बीता हुआ वर्ष
अब तुम्हें याद दिलाएगा कि
क्या नव वर्ष में भी ऐसी ही
प्रगति होगी उत्कृष्ट मानव जीवन की?

मोमबत्ती जलाकर कब तक
श्रद्धांजलि देते रहोगे?
नव वर्ष में किसी स्त्रा की आबरू
न टूटने का संकल्प बना लो
और बहा दो प्रेम से
नव वर्ष की नव शांति को।
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