ट्रंप बनाम मस्क : दो तुर्रमों की टक्कर

दो तुर्रमखान आपस में भिड़ें, तो दुनिया तमाशा देखे या डर जाए – तय करना मुश्किल है! अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और दुनिया के सबसे धनवान शख्स एलन मस्क की ताजा जंग ने यही दुविधा खड़ी कर दी है। कभी ये दोनों एक-दूसरे की पीठ ठोंकते थे। दो पहलवान दोस्तों की तरह गलबहियाँ डाले अखाड़े में उतरते थे। मगर अब एक-दूसरे पर तलवारें खींच चुके हैं। तमाशा ऐसा कि पॉपकॉर्न खत्म होने से पहले ही शेयर बाजार धड़ाम!

सयाने याद दिला रहे हैं कि यह सब शुरू हुआ ट्रंप के बिग ब्यूटीफुल बिल से। मस्क ने जिसे घृणित और शर्मनाक करार दिया। यह बिल टैक्स कटौती और सख्त आव्रजन नीतियों का मिश्रण है; दरअसल ट्रंप का सपना है। लेकिन मस्क को इसमें अर्थव्यवस्था का कबाड़ा दिखता है। टेस्ला और स्पेसएक्स के जरिए आसमान छू रहे मस्क को इस बिल से अपनी कंपनियों को नुकसान पहुँचने की आशंका हैं। ट्रंप ने जवाब में मस्क की सरकारी सब्सिडी और कॉन्ट्रैक्ट्स रद्द करने की धमकी दी। मस्क ने पलटवार किया कि अगर वे न होते, तो ट्रंप चुनाव हार जाते!

मस्क-ट्रंप दुश्मनी: अहंकार की टक्कर का धमाका

बढ़ते-बढ़ते मामला इतना बढ़ गया कि मस्क ने ट्रंप प्रशासन के डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) से किनारा कर लिया। इतनी तीव्र गति से मस्क और ट्रंप का दोस्ताना चूर-चूर होता देख ऐसा लगता है जैसे तुलसी बाबा ने इन दोनों के लिए कहा हो – खल की प्रीति जथा थिर नाहीं! विडंबना यह है कि ये दोनों ही महापुरुष अल्फा व्यक्तित्व हैं। ट्रंप अपनी रैलियों में खुद को दुनिया का तारणहार बताते हैं; तो मस्क मंगल ग्रह पर बस्ती बसाने का सपना देखते-दिखाते हैं।

दोनों का अहंकार ऐसा कि एक माचिस की तीली और दूसरा बारूद – जब टकराएँगे, तो धमाका तो होगा ही। मस्क ने तो एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप का नाम होने का बम भी फोड़ दिया, बिना सबूत के। ट्रंप ने जवाब में मस्क को नकली मित्र ठहराया। अब ये दोनों सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को ललकार रहे हैं, जैसे गली के दो गुंडे – जिनके पास ट्विटर और ट्रुथ सोशल के हथियार हैं!

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ट्रंप-मस्क टकराव: सत्ता, पैसा और पाखंड का खेल

दुनिया साँस रोके देख रही है। क्या हो सकता है इस द्वंद्व का परिणाम? सबसे पहले तो टेस्ला के शेयरों का हाल देख लीजिए। एक दिन में 150 अरब डॉलर का नुकसान! यह रकम इतनी है कि पाकिस्तान का सालाना बजट इसके सामने जेबखर्च लगे। निवेशक डर रहे हैं कि ट्रंप महाशय इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन एनर्जी की सब्सिडी खत्म कर देंगे, जिससे मस्क की कंपनियों को झटका लगेगा। दूसरी ओर, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी में भी खलबली है।

कुछ सांसद मस्क के साथ हैं, कुछ ट्रंप के। कहना गलत न होगा कि यह टकराव अब निजी नहीं रहा, अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था का सवाल बन गया है! यानी, यह दो ऐसे साँड़ों की लड़ाई है, जिनके सींगों में दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक घास फँसी है। मस्क चाहते हैं कि सरकार अपने खर्चे कम करे, लेकिन ट्रंप का महा सुंदर बिल खजाना खाली करने पर आमादा है। सरकारी फिजूलखर्ची रोकने का दावा करनेवाली, मस्क की डीओजीई परियोजना खुद मस्क के इस्तीफे के साथ डीओजी बनकर कुत्ता-गति को प्राप्त हो रही है! और ट्रंप? वे तो वही करेंगे, जो वे हमेशा करते हैं – अपनी तारीफ और दूसरों की बेइज्जती!

अंतत, मस्क और ट्रंप के कपटपूर्ण प्रेम की यह त्रासद परिणति इस बोध कराने के लिए पर्याप्त है कि- हे तात, सत्ता और पैसे के खेल में दोस्ती सिर्फ तब तक चलती है, जब तक मुनाफा हो! ट्रंप और मस्क की यह लड़ाई न केवल अमेरिका, बल्कि भारत जैसे देशों को भी प्रभावित कर सकती है, जहाँ मस्क की स्टारलिंक जल्द लॉन्च होने वाली है। तो, प्रिय पाठकवृंद, पॉपकॉर्न लीजिए और इस साँड़-युद्ध का आनंद उठाइए। क्योंकि असली तमाशा शायद अभी बाकी है!

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