वीके पॉल : एआई से बदलेगा भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र

नयी दिल्ली, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने मंगलवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बदलने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति को रफ्तार प्रदान करने का रणनीतिक अवसर प्रदान करती है।

राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ के एक सत्र में अपने संबोधन में डॉ. पॉल ने कहा कि भारत की विशाल आबादी, विविधता और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के दोहरे बोझ को देखते हुए सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि एआई को भारत के बढ़ते डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के साथ एकीकृत करने से स्वास्थ्य प्रणाली में अंतरसंचालनीयता, वास्तविक समय में विश्लेषण और संसाधनों का अधिक कुशल आवंटन सुनिश्चित होगा।

एआई से बदलेगा स्वास्थ्य तंत्र, भरोसा जरूरी

डॉ. पॉल ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बदलने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति को गति देने का एक रणनीतिक अवसर प्रदान करती है।” उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को काफी हद तक बेहतर बना सकती है, शीघ्र निदान में मदद कर सकती है, रोग निगरानी को मजबूत कर सकती है और डेटा-आधारित नीति निर्माण में सहायता दे सकती है।

डॉ. पॉल ने सुरक्षा और लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत नियामक ढांचे, नैतिक सुरक्षा उपायों और लगातार सत्यापन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने विशाल आबादी को प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम किफायती स्वदेशी एआई समाधान विकसित करने के लिए सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच लगातार सहयोग का आह्वान किया।

सत्र में रॉयल फिलिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रॉय जैकब्स ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग, कार्यबल की कमी और देखभाल की बढ़ती जटिलता के कारण दुनिया भर में स्वास्थ्य प्रणालियां भारी दबाव में हैं, जिससे एआई का एकीकरण न केवल एक अवसर, बल्कि आवश्यकता भी बन गया है।

हालांकि, जैकब्स ने स्पष्ट किया कि एआई अकेले स्वास्थ्य सेवा में बदलाव नहीं ला सकता; बल्कि इसके लिए सुदृढ़ डेटा गवर्नेंस, निर्बाध डेटा प्रबंधन और मजबूत नैदानिक ​​एकीकरण भी जरूरत है। ‘डेटा गवर्नेंस’ से आशय नीतियों, प्रक्रियाओं और भूमिकाओं के एक रणनीतिक ढांचे से है, जो यह सुनिश्चित करता है कि डेटा अपने पूरे जीवनचक्र में सटीक, सुरक्षित और इस्तेमाल योग्य स्वरूप में उपलब्ध रहे। (भाषा)

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