बकाया शुल्क का भुगतान कब तक : कोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश जारी कर सवाल किया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दिव्यांगजनों को देय शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान कब तक किया जाएगा। यह निर्णय लिया गया कि पिछले सप्ताह जारी अंतरिम आदेश, जिसमें डीबीटी पद्धति के माध्यम से छात्रों के बैंक खातों में सीधे शुल्क जमा करने से संबंधित प्रावधान को निलंबित कर दिया था, यह निलंबन अगले आदेश जारी होने तक लागू रहेगा।

उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस जुव्वाड़ी श्रीदेवी ने सोमवार को पुन एक बार शुल्क प्रतिपूर्ति के संदर्भ में शुल्क न वसूलने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश को चुनौती देने वाली कई निजी कॉलेजों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी अधिवक्ता एस. राहुल रेड्डी ने दलील देते हुए शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान के संबंध में प्रतियाचिका दायर करने के लिए कुछ और समय माँगा। उन्होंने कहा कि शुल्क प्रतिपूर्ति प्रणाली के तहत भुगतान संबंधित कल्याण विभागों के माध्यम से जारी रहेगा।

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छात्रों के खातों में सीधे जमा होगी फीस

साथ ही कई कॉलेजों को जारी किए गए टोकन समेत कुल राशि जारी की जाएगी। इसके अलावा शुल्क से संबंधित राशि सीधे छात्रों के खातों में जमा की जानी चाहिए, जिसके बाद वे कॉलेजों को भुगतान करेंगे। सरकारी आदेश संख्या 7 के अनुच्छेद-5 के खण्ड-12 की व्याख्या के लिए एक समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि तब तक छात्रों पर भुगतान करने का दबाव न डाला जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा लाए गए नए प्रावधान के कारण पुराने बकाये की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि सरकारी आदेश के अनुच्छेद-5 के खण्ड-12 के अनुसार सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दिव्यांग से संबंधित शुल्क सीधे छात्रों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी-डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से जमा करेगी और बाद में छात्र टीएएफआरसी द्वारा निर्धारित राशि का भुगतान खातों से करेंगे।

इस कारण कॉलेजों के लिए शुल्क वसूलने की कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने पिछले सप्ताह दिए गए अंतरिम आदेश को बढ़ाने की माँग की, जिसके जरिए इस पर रोक लगाई गई थी। दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने सरकार को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष को ध्यान में रखते हुए 24 जून तक प्रतियाचिका दायर करने का आदेश दिया और यह भी कहा कि सरकारी आदेश के प्रावधानों पर जारी किया गया अंतरिम आदेश अगले आदेश जारी होने तक अमल में रहेगा।

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