आखिर पल-पल क्यों बदलती है ट्रंप की चाल ?

यह पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने यूटर्न लिया हो, अपने दूसरी बार के कार्यकाल की शुरुआत से ही अब तक ट्रंप का यह नया रूप दुनिया को कई बार देखने को मिला है। भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा भी वह अब तक 65 बार कर चुके हैं तो आखिर इस बार ट्रंप के ईरान पर पांच दिन के सीजफायर का क्या मतलब है, यह समझना होगा कि यह केवल उनका यूं ही दिया गया बयान है या फिर सोची-समझी साजिश। कहीं ऐसा तो नहीं कि ट्रंप का साथ जब नाटो देश नहीं दे रहे हैं और वह युद्ध में अलग-थलग पड़ रहे हैं।

ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटाने की मुनादी करने वाले अमेरिकन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया है। अचानक उनके इस फैसले पर दुनिया हैरान है। वहीं अमेरिका की जनता ईरान पर युद्ध को जायज नहीं मान रही है। ट्रंप भी अंदरखाने मान चुके हैं कि इस युद्ध में इजराइल ने उनको धकेला है तो वह इजराइल को बीच मैदान में छोड़ना चाहते हैं और अंतहीन युद्ध से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।

देखा जाए तो अभी कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने की नाकाम कोशिश की थी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर अगले 48 घंटे के भीतर ईरान ने होर्मुज से होने वाली आवाजाही में दखल खत्म नहीं की तो विनाशकारी परिणाम होंगे। अब ईरान पर अचानक ट्रंप का रुख बदल गया है। उस समय ट्रंप की धमकी से वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें अचानक बढ़ गईं थीं। अब वह अपनी धमकी से ही मुकर गए हैं।

सोमवार सुबह ट्रंप ने अपना फैसला ही बदल दिया। उन्होंने कहा कि अब ईरान को पांच दिन का और समय दिया जा रहा है क्योंकि बातचीत में प्रगति हो रही है। उधर ईरान ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। इस तरह ट्रंप का फैसला बदलने पर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप के आलोचक कह रहे हैं कि यह उनकी कोई नई चाल है। वह युद्ध में किसी भी नीति का पालन नहीं करते हैं। साथ ही आलोचकों का कहना है कि ट्रंप, हर बात से पीछे हटते हैं, पलटी मारना तो उनकी आदत में शुमार हो चुका है।

आर्थिक नजरिए से कैसा है यह फैसला?

ट्रंप ने 5 दिन का समय देने का ऐलान, अमेरिकी समय के हिसाब से सोमवार सुबह बाजार खुलने से ठीक पहले किया था। अगर उनका ऐलान सामने न आता तो अमेरिकी शेयर मार्केट का डूबना तय था। ऐलान के बाद शेयर बाजार मजबूत हो गए और तेल की कीमतें गिर गईं।

मार्केट देखकर ऐलान करते हैं डोनल्ड ट्रंप?

ट्रंप, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गिराने-उठाने वाले माहिर खिलाड़ी हो गए हैं। वह अपने रणनीतिक ऐलानों को अक्सर, बाजार के खुले या बंद होने के समय पर ही करते हैं। टैरिफ लागू भी शनिवार आधी रात के बाद किए गए जब बाजार बंद थे। उन्होंने चीन पर 130 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान, पावार को बाजार बंद होने के 20 मिनट बाद किया था।

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ईरान युद्ध के ऐलान में भी रणनीति थी?

ट्रंप ने ईरान पर पहले हमलों का ऐलान भी पावार को बाजार बंद होने के बाद किया था। जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने का ऑपरेशन भी वीकेंड पर हुआ। ट्रंप, बाजार को अपने हिसाब से नियंत्रित करना चाहते है। सोमवार को ट्रंप का पांच दिन का समय देने वाला ऐलान बाजार खुलने से पहले किया गया। बाजार को उन्होंने बड़ा नुकसान होने से बचाया है। अब नई समयसीमा वीकेंड के बाद खत्म होगी, जब बाजार बंद रहेंगे।

ट्रंप अचानक क्यों पलटे हैं?

ट्रंप का कहना है कि बातचीत अच्छी चल रही है इसलिए समय बढ़ाया गया। ईरान इस बात से साफ इनकार कर रहा है। आलोचक मानते हैं कि ट्रंप बाजार को स्थिर रखने और आर्थिक दबाव कम करने के लिए ऐसे समय पर ऐलान करते हैं। चाहे युद्ध का फैसला हो या टैरिफ का, ट्रंप की घोषणाएं अक्सर वॉल स्ट्रीट के शेड्यूल से मैच करती दिखती हैं। अब देखना होगा कि 5 दिन बाद क्या होता है। क्या ट्रंप, हमले बढ़ाते हैं या फिर से पलट जाते हैं।

ट्रंप ने इजराइल को पूरे गेम प्लान से बाहर कर दिया?

ईरान के साथ अमेरिका की जारी जंग थम गयी। सोमवार को ट्रंप ने दावा किया ईरान से बात हो रही है और जंग को 5 दिनों तक रोक दिया गया है। लेकिन, सारी दुनिया जानना चाहती है कि इन सबके बीच इजराइल कहां है? क्या ट्रंप जब सीजफायर के लिए अपने सलाहकारों से बात कर रहे थे, तब उनका गुड फ्रेंड इजराइल उसमें शामिल था, या घोषणा से पहले उनको खबर दी गई थी। ऐसा कुछ लगता तो नहीं है।

अपने बेबाक अंदाज में ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान किया। ईरान के पावर प्लांट पर हमले की चेतावनी के 48 घंटे पूरे होने वाले थे, तभी ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसकी भनक इजराइल को भी नहीं लगी। जब वे इसका अनाउंसमेंट कर रहे थे, तभी इजराइल ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सुरक्षा मुख्यालय पर हमला कर रहा था। अब जानने वाली बात ये है कि क्या ट्रंप के सलाहकारों ने उनको इस जंग के फायदे नुकसान गिना दिए थे? क्या इजराइल की वजह से अमेरिका को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था? या फिर ट्रंप जिस उद्देश्य से ईरान पर हमले कर रहे थे, वो पूरा हो गया था?

ऐलान से वाशिंगटन और तेल अवीव में खलबली मच गई

सोमवार तड़के (अमेरिकी समयानुसार) ट्रंप ने एक ऐसा बम फोड़ा कि पूरी दुनिया सन्न रह गई। ये ऐलान था ईरान के साथ जंग को रोकने और बातचीत का दौर शुरू करने का। इस ऐलान से वाशिंगटन से तेल अवीव तक खलबली मच गई। इसके बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था। ऐसा लग रहा था कि आज ट्रंप ईरान के पावर प्लांट पर हमला करने की घोषणा करेंगे।

ट्रंप ने अपनी सुरक्षा सलाहकार समिति के साथ बैठक की। लंबे देर तक चली इस बैठक में इस जंग से जुड़े नफा-नुकसान, दुश्मन और दोस्त सभी पहलुओं पर बात हुई, जिसमें उनके सलाहकारों ने सलाह दी कि वे इजराइल के चक्कर में मीडिल ईस्ट में फंस गए हैं। जब ट्रंप ईरान के ऊर्ज़ा ठिकानों पर विनाशकारी हमले को रोकने और कूटनीतिक बातचीत की मेज सजाने की तैयारी कर रहे थे, तब इजराइल इस पूरी प्रक्रिया में कहीं शामिल नहीं था। अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगी को उसी के युद्ध में चिमटे से पकड़कर साइडलाइन कर दिया गया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बड़े-बड़े अक्षरों में पोस्ट करते हुए लिखा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में हमारी दुश्मनी के पूर्ण और समग्र समाधान को लेकर बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। ट्रंप का दावा है कि दोनों पक्ष इस बात पर राजी हो गए हैं कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से छोड़ने पर सहमत होगा। ट्रंप का कहना है कि इस डील की शर्तें इजराइल को खुश कर देंगी।

ऐलान के बाद नेतन्याहू की चुप्पी

ट्रंप ने भले ही यह सोच लिया हो कि उसने इजराइल को अपने गेम प्लान से बाहर कर दिया है। इजराइल उनके फैसलों पर खुश हो जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। ट्रंप के इस चौंकाने वाले ऐलान के तुरंत बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो की सबसे खास बात यह थी कि इसमें नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नाम तक नहीं लिया और उनके शांति प्रस्ताव पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली। एक तरफ ट्रंप 5 दिन का युद्धविराम देकर ईरान से डील पक्की कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इजराइल ने अपना आक्रमक रुख और तेज कर दिया है। आधी रात को ईरान भी पलटवार करते हुए मिसाइल दाग रहा है।

क्या चाहता है इजराइल

राजेश श्रीवास्तव
राजेश श्रीवास्तव

कुल मिलाकर ट्रंप का यह सोलो गेम प्लान भले ही अमेरिका को युद्ध से बाहर निकालने की दिशा में एक कदम हो, लेकिन इजराइल ने तेहरान पर बमबारी करके साफ संदेश दे दिया है कि वह किसी भी बुरी डील को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करेगा और न ही अपनी सुरक्षा से कोई समझौता ही करेगा।

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