भू मुआवजे का भुगतान क्यों नहीं किया गया : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सवाल किया कि श्रीपाद सागर येल्लमपल्ली परियोजना के तहत जारी धनराशि से पीड़ितों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। उच्च न्यायालय ने सरकार को जारी धनराशि से मुआवजे का भुगतान न करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। अदालत ने सरकार को प्रतियाचिका दायर करने का नोटिस जारी किया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने हाल ही में करीमनगर के रामगिरी नंदय्या सहित 21 लोगों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई की, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने श्रीपाद सागर येल्लमपल्ली परियोजना के तहत 58 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन उस राशि में से उन्हें भू मुआवजा नहीं दिया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डी. अंबेडकर ने दलील देते हुए कहा कि सरकार ने श्रीपाद सागर परियोजना के तहत मुआवजे के रूप में 58 करोड़ रुपये के भुगतान हेतु वर्ष 2011 के दौरान एक सरकारी आदेश जारी किया था, लेकिन यह राशि नहीं दी गई।
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अंबेडकर ने कहा कि सरकार का यह कहना अनुचित है कि वर्ष 2023 में लाए गए सरकारी आदेश संख्या 320 के तहत मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने इसे अवैध घोषित करने की माँग की। उन्होंने सरकार को ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे के किसानों को पहले से जारी किए गए 58 करोड़ रुपये में से मुआवजा न देना अनुचित है। उन्होंने ब्याज सहित तत्काल मुआवजा देने का आदेश देने की माँग की। सुनवाई के पश्चात न्यायाधीश ने प्रतिवादियों, सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव, ईएनसी, श्रीपाद सागर परियोजना निदेशक और जग्तियाल ज़िलाधीश को नोटिस जारी की। अदालत ने प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर प्रतियाचिका दायर करने का आदेश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
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