सौ साल जीने के लिए अपनाएँ ये उपाय
हमारे यहाँ ऋषि-मुनियों से लेकर घर के बुजुर्गों तक सभी लोग चिरायु भव, शतायु भव तथा दीर्घायु भव का आशीर्वाद दिया करते हैं। हर व्यक्ति की यही कामना होती है कि वह दीर्घ जीवन पाए, किन्तु यह दीर्घ-जीवन हमें किस प्रकार मिल सकता है, शायद ही इस पर हम कभी विचार करते हैं। कैंसर, डायबिटिज, रक्तचाप आदि जैसी अनेक ऐसी बीमारियां हैं जिनका सटीक उपचार अभी तक खोजा नहीं जा सका है।
प्राकृतिक चिकित्सा और होलिस्टिक उपचार का महत्त्व
कुछ वैज्ञानिकों की राय है कि सौ वर्षों तक जीने के लिए हमें प्रकृति के अनुकूल अपना आचरण करना होगा तथा अंधी दौड़ की तरफ से हमें अपना मुँह मोड़ना ही होगा। कुछ वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि योग, अध्यात्म, संगीत, एक्यूपंक्चर और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक बनाकर फिर से शतायु की कामना को साकार किया जा सकता है। संगीत के अन्तर्गत अगर भक्ति संगीत को प्राथमिकता दी जाए, तो अनेक रोगों को आने से रोका जा सकता है। मेडिटेशन हमारी जीवन-शक्ति में वृद्धि करता है। ध्यान की पद्धति सभी के लिए एक समान ही होती है।
यह सत्य है कि हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हुआ करती हैं। कुछ लोग जल्दी बीमार पड़ जाते हैं, तो कुछ में बीमारी से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। बीमारियों के फैलने के पीछे कहीं-न-कहीं हमारी जीवन पद्धति में गड़बड़ी अवश्य हुआ करती है। डायबिटिज (मधुमेह), अस्थमा, आर्थराइटिस, ब्लडप्रेशर, सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस, बवासीर आदि अनेक ऐसी बीमारियां हैं जिनका एलोपैथी में कोई कारगर उपचार नहीं है, किंतु होलिस्टिक उपचार के ज़रिए इन्हें ठीक किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें…ताकि आवाज बन सके मधुर
एक्युपंक्चर एक चीनी चिकित्सा पद्धति है, जिसके अनुसार सम्पूर्ण शरीर कई चैनलों में विभक्त है। किसी भी चैनल के समस्याग्रस्त होने पर पूरा शरीर प्रभावित हो जाता है। मेडिटेशन (ध्यान), योग एवं एक्युपंक्चर, ये तीनों ही अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां हैं, लेकिन इन तीनों में ही एक अद्भुत साम्य है। एक्युपंक्चर पद्धति के अनुसार, अगर पेट में दर्द है तो दाहिने पांव और दाहिने हाथ को दबाने से पेट दर्द में आराम मिल सकता है। इसी प्रकार पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए हाथ और पांव के अंगूठों को दबाया जाता है।
भजन, ध्यान और योग से शतायु होने का रहस्य
यह पद्धति चीन और जापान में अत्यंत ही लोकप्रिय है। योग, ध्यान-मेडिटेशन एवं एक्युपंक्चर तीनों के सम्मिलित रूप को होलिस्टिक कहा गया है। इन तीनों के प्रयोग से आज की महामारी मधुमेह तक को समाप्त किया जा सकता है। मधुमेह की बीमारी लगातार शरीर के वजन को कम करती रहती है और हमेशा थकावट का आभास होता रहता है। इस पर समय रहते ध्यान न देने पर किडनी अपना काम करना बंद कर देती है और परिणाम असमय मृत्यु ही होती है।
ध्यान एवं योग के लिए नियमित रूप से समय निकालना, बुद्धिमानों का काम होता है। एकान्त स्थान पर बैठकर ध्यान लगाना, योगासन करना स्वास्थ्य के लिए अमृत तुल्य माना जाता है। इन्हीं क्रियाओं को करके प्राचीन काल में ऋषि-मुनि हज़ारों वर्ष तक जीवन का आनंद उठाया करते थे। कर्णप्रिय स्वर में भजन-संगीत का कैसेट सुनते रहने से जीवनी-शक्ति में विकास होता है।
यह भी पढ़ें…उच्च रक्तचाप से रहें बच कर
अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार भजन-संगीत को नित्यप्रति तीस मिनट तक सुनते रहने से सांस की आयु प्रतिदिन दस मिनट की दर से बढ़ती रहती हैं और मनुष्य सौ साल तक जीने की कल्पना को साकार कर सकता है। योगाचार्य वैद्य गौरीनाथ झा के अनुसार भजन संगीत, ध्यान, योग तथा आहार-विहार पर ध्यान देकर दिनचर्या को करने वाला व्यक्ति शतायु हो सकता है।
आनंद कुमार अनंत
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



