त.मा.शा कैफे – पुरानी यादों और स्वाद का जोड़

कोविड के पश्चात अधिकतर लोग शाकाहारी व पौष्टिक भोजन की ओर ध्यान देने लगे हैं। यही वक़्त था, जब महेंद्र व्यास और ए. के. सोलंकी ने तय किया कि ऐसा क़ैफे खोला जाए, जो केवल शाकाहारी व पौष्टिक व्यंजन ग्राहकों को परोसता हो। 2023 के जनवरी में तमाशा का उद्घाटन हुआ। हमने जब इस क्षेत्र में प्रवेश किया तो यहाँ किसी प्रकार की प्रतिद्वंद्वीता नहीं थी। हालांकि लोगों ने काफी निराशावादी बातें कही थीं कि केवल एशियाई वैज खान-पान के भरोसे कोई क़ैफे कैसे चलेगा? हमने इसे एक चुनौती के तौर पर लिया और मैदान में कूद गए। आज नतीजा आपके सामने है। ए. के. सोलंकी ने हमें बताया।

ए. के. सोलंकी 15 साल पूर्व एक शेफ रह चुके हैं। देश-विदेश में उन्होंने शेफ के तौर पर काफी अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में हर वक़्त कुछ नयापन लाने का प्रयास करते हैं। हमने इनके कारखाना में स्थित गनरॉक एन्क्लेव के क़ैफे में मॉकटेल, कोरियाई किमची रैमन और ब्लैक पैपर मशरुम राइस बाउल का ज़ायका लिया। स्वाद और बनावट के हिसाब से खाना बिल्कुल सही था।

सोलंकी ने हमें बताया, हैदराबाद में पकवान में ज़्यादा प्रयोग करके नयापन लाना, मैंने अधिक नहीं देखा है। हमने पूछा कि तमाशा का अर्थ क्या है, तो उन्होंने समझाया कि मैंडरिन भाषा में त का अर्थ है- स्त्रा, मा का हर भाषा में माता और शा मैन्डरिन में शक्ति को दर्शाता है। एक तरह से यह नामकरण स्त्रा-शक्ति को समर्पित है। कोरियाई, थाई, इंडो-चीनी व थोड़े कॉन्टिनेंटल व्यंजन एक कैज़ुअल डाइनिंग व क़ॉफी-शॉप के तहत यहां परोसे जाते हैं। शुरु में अधिकांश शाकाहारी समुदाय को आकर्षित करते हुए, जुबली हिल्स, फिर एबिड्स में सफलता प्राप्त हुई।

रेट्रो एम्बिएंस और लाइव म्यूज़िक से खास बना ‘तमाशा’

डेढ़ साल पहले कारखाना में नयी शाखा खोली गयी। चौथी शाखा खोलने की भी योजना है। इस क़ैफे के एम्बिएंस की बात करें तो रेट्रो लुक दिया गया है। दीवार पर टंगे गिटार और ग्राम़ोफोन रिकॉर्ड बीते दशकों की याद दिलाते हैं। इधर-उधर कुछ किताबें और रेट्रो पोस्टर भी प्रदर्शित हैं। विशेष दिनों पर विशिष्ट पकवान होते हैं, जैसे- हाल में चीनी नववर्ष मनाया गया था, जिसकी पुष्टि वहां छत से टंगे चीनी छाते कर रहे थे। महिला-दिवस और अन्य विशेष दिनों पर कलाकारों की महिफल जमती है, जो अपने संगीत से अतिथियों का मनोरंजन करते हैं। पेट्स को भी अतिथि यहां ला सकते हैं।

खेल में दिलचस्पी रखने वालों के लिए दो पिकलबॉल कोर्ट भी हैं। अत एक पारिवारिक ईट-आउट के दृष्टिकोण से भी तमाशा सटीक है। मज़े की बात है कि यहां मदिरापान उपलब्ध नहीं है, परन्तु यहाँ अल्कोहल रहित रुट-बियर मिलता है, जिसे यहां की रसोई में ही फॉरमेंट किया जाता है। क्रेनबेरी से भरा शट अप एंड किस मी की माँग अधिक रहती है। यहां तक कि नूडल्स व रैमेन को भी यहीं पर मैदे के बजाय आटे या मखाना से बनाया जाता है। कोरियाई पकवान की माँग यदि सबसे ज़्यादा है तो जापान की ग्युज़ा भी काफी लोकप्रिय है।

जैस्मिन राइस से लाइव म्यूज़िक तक, हर चीज़ खास

खाद्य-सामग्री बात करें तो जैस्मिन राइस जैसे कुछ ख़ास सामग्रियों का वियतनाम या थाईलैंड से आयात होता है, जबकि अधिकांश सामग्री हैदराबाद या बैंगलोर से मंगाई जाती है। क्वालिटी का ख़ास ख्याल रखा जाता है। सब कुछ तब के तब बनाया जाता है और हर सुबह पदार्थों की समीक्षा की जाती है। ए. के. सोलंकी कहते हैं, सबसे अच्छी स्किल पाना हमेशा मुश्किल होता है, क्योंकि मुझे यह काम आता है, इसलिए मैंने अपने नीचे काम करने वालों को इसके गुर सिखाए हैं।

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स्किल वाले मज़दूर ढूंढना एक चुनौती है। उनके लिए एक ऐसी दिल को छूने वाली जगह बनाना, जो पुराने ज़माने के स्टाइल और लाइव म्यूज़िक के साथ शाकाहारी खाने का जश्न मनाए, यही उन्हें प्रोत्साहित करता है। महेंद्र व्यास, एक ऐसा अनुभव बनाने पर ध्यान देते हैं, जो खाने, रचनात्मकता और अच्छे सामाजिक संबंधों को मिलाता हो। तमाशा एक खास शाकाहारी क़ैफे है, जो एशियन स्वाद, एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग और एक मज़बूत विज़ुअल पहचान को जोड़ता है। आप यहां सुबह 11 बजे से रात 11 बजे के बीच अपनी बुकिंग का मज़ा ले सकते हैं।

-दिव्यता बी.

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