लोकसभा में आज पेश होंगे तीन विधेयक, परिसीमन पर टकराव के आसार

नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने साल 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए तीन विधेयकों को बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया है। बुधवार को जारी एक बुलेटिन से यह जानकारी मिली है।

बुलेटिन के मुताबिक, संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक)-2026 को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा।

बुलेटिन के अनुसार, पहले दो विधेयक जहाँ केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, वहीं तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के पटल पर रखेंगे। बुलेटिन में कहा गया है कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने बहस के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है और यह (बहस) शुक्रवार को भी जारी रह सकती है। लोकसभा में पारित होने के बाद ये विधेयक राज्यसभा के पास जाएँगे।

एकजुट संघर्ष का शंखनाद किया विपक्ष ने

देश भर में विपक्षी दलों ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार से परिसीमन को लेकर सवाल उठाए और प्रस्तावित परिसीमन पर चिंता जताई। दक्षिण के गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों ने भी एकजुट होकर अपने-अपने राज्यों के हितों को लेकर चिंता जताई है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की कि विपक्ष ने संसद में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ मतदान करने का संकल्प लिया है।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ 16 अप्रैल को पूरे राज्य में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन की घोषणा की और केंद्र को चेतावनी दी कि यदि उसने दक्षिणी राज्य की आवाज पर ध्यान नहीं दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

विपक्षी नेताओं ने आम सहमति की कमी और सत्र के समय को लेकर चिंता जताई। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे।

राजनीतिक माहौल गर्म होने के संकेत

हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन इसे जिस तरीके से पेश किया जा रहा है, उस पर हमें आपत्ति है। यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। विपक्षी दलों को चुप कराने और दबाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है। खड़गे ने विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक के बाद कहा, हम लगातार महिला आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं।

हम पहले पारित संशोधन को लागू करने पर जोर दे रहे हैं। वे (भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार) परिसीमन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए, सभी दलों ने एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है। द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने परिसीमन के विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पार्टी सांसदों और पार्टी जिला सचिवों की एक आपात बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, हमारे सिर पर लटकी तलवार अब हम पर आ गिरी है।(भाषा) 

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