पेशी का आदेश मिलने के बाद पुनर्वास के लिए दिया गया मुआवजा
हैदराबाद, वित्त विभाग के प्रधान सचिव संदीप सुल्तानिया की पेशी से एक दिन पहले अधिकारियों ने पीड़ितों को पैसा सौंप दिया। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मल्लन्ना सागर और अन्य जलाशयों के निर्माण के दौरान विस्थापित हुए एकल महिलाओं और पुरुषों को एक अलग परिवार मानकर उन्हें पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण योजना के तहत मुआवजा देने का आदेश दिया था और आदेश का पालन न होने पर वित्त विभाग के प्रधान सचिव संदीप सुल्तानिया को अदालत में हाजिर होने के आदेश भी दिए गए थे।
संदीप सुल्तानिया के अदालत में हाजिर होने से एक दिन पूर्व ही अधिकारियों ने पीड़ितों को पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के तहत आर्थिक मुआवजा जारी किया, जबकि सात साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद, यह पैसा प्राप्त नहीं हुआ था। मल्लन्ना सागर से विस्थापित हुए लोगों द्वारा पुनर्वास के लिए दायर की गई 79 याचिकाओं में से केवल 55 को ही मुआवजा मिला और शेष 34 लोगों की मुआवजा प्राप्त किए बिना ही मृत्यु हो गई।
यह भी पढ़ें… एनओसी जमा होने पर ही जारी हो पासपोर्ट : अदालत
एकल व्यक्तियों के पुनर्वास पर विवाद तेज
वेमुला घाट के 52 और एटीगड्डा किश्टापुर के 27 लोगों ने 2019 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर माँग की थी कि एकल पुरुषों और महिलाओं को अलग से परिवार में शामिल न किया जाए और उन्हें 12.54 लाख रुपये का मुआवजा और 250 गज पर मकान बनाने के लिए जमीन आवंटित की जाए। मामले की सुनवाई करने वाले उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से उनकी पहचान की और नवंबर-2023 में पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण योजना के तहत उन्हें पैसा देने का फैसला सुनाया, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ताओं ने फिर से न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर की।
सरकार ने अदालत की अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई यह आश्वासन देकर समाप्त की कि छह सप्ताह के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा। हालाँकि, भुगतान न होने पर अदालत ने अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई फिर से शुरू की। मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस वाकिटी रामकृष्ण रेड्डी ने वित्त विभाग के प्रधान सचिव संदीप सुल्तानिया को नोटिस जारी कर इस महीने की 15 तारीख को पेश होने का आदेश दिया।
बुधवार को जब न्यायाधीश ने अदालत की अवमानना याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई की, तो याचिकाकर्ताओं के वकील रवि ने दलील देते हुए बताया कि मंगलवार शाम को प्रत्येक व्यक्ति को 12.54 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था। हालाँकि, उन्होंने कहा कि सात साल का ब्याज और आवास पट्टा अभी तक नहीं दिया गया है। दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश ने सरकार को आवास पट्टा और ब्याज भुगतान पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया और सुनवाई 17 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



