बिना स्पष्टीकरण माँगे जाँच समाप्त करना सही नहीं : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कहा कि सूचना के अधिकार आयोग द्वारा बिना नोटिस प्राप्त किए जाँच करना और बिना स्पष्टीकरण माँगे शिकायत पर जाँच बंद कर देना अनुचित है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस प्राप्त होने से पहले शिकायतकर्ता के उपस्थित न होने के आधार पर जाँच बंद करना सहज कानून के सिद्धांतों के विरुद्ध है। अदालत ने आदेश दिया कि एक नया नोटिस जारी किया जाए और शिकायतकर्ता पर जाँच की जाए तथा तीन सप्ताह के भीतर निर्णय सुनाया जाए।
पेद्दापल्ली ज़िले के बी. शंकरय्या ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रस्ताव चरण से संबंधित जानकारी पर निचली अदालतों से कोई जवाब न मिलने के बाद राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के लिए गत 29 अगस्त को दिया गया नोटिस 3 सितंबर को प्राप्त हुआ और शिकायत पर जाँच बंद कर दी गई। शंकरय्या ने सूचना के अधिकार आयोग के इस निर्णय को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
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उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस सूरेपल्ली नंदा ने इस मामले की सुनवाई की और आयोग द्वारा दिए गए आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की दलील सुने बिना शिकायत पर जाँच बंद करना गलत था। अदालत ने नवीनतम नोटिस जारी कर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिकाकर्ता की शिकायत का तीन सप्ताह के भीतर समाधान करने के आदेश दिए।
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