न्यायाधिकरण में सुलझाएँ मंदिर भूमि विवाद : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हैदराबाद ज़िले के गोलकोंडा मंडल के शेखपेट में सर्वे नं. 139 और 140 स्थित 3.13 एकड़ भूमि पर विस्तारित संबंधित भूमि विवाद का समाधान धर्मस्व न्यायाधिकरण (एंडोमेंट ट्रिब्यूनल) में किया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने कहा कि दीवानी न्यायालय (सिविल कोर्ट) द्वारा भूमि को धर्मस्व विभाग की संपत्ति घोषित करना सही नहीं है।
न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत ने अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया था। संबंधित व्यक्ति यह साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका कि हनुमान मंदिर का निर्माण और रखरखाव उसके पूर्वजों द्वारा किया गया था। हालाँकि अदालत ने यह माना कि धर्मस्व विभाग की भूमि से संबंधित विवादों के समाधान के लिए एक विशेष धर्मस्व न्यायाधिकरण है और यह दीवानी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
मंदिर विवाद में हाई कोर्ट का फैसला, अपील खारिज
अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्तियों को इस विवाद का समाधान धर्मस्व न्यायाधिकरण में करना चाहिए। सत्यनारायण अग्रवाल ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील याचिका दायर की। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस वाकिटी रामकृष्णा रेड्डी की खण्डपीठ ने सुनवाई पूर्ण कर अपना फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने 120 वर्ष पहले मंदिर का निर्माण और रखरखाव किया था और यह सार्वजनिक दान से नहीं चल रहा है। याचिकाकर्ता को उनके चाचा श्रीकिशन अग्रवाल की ओर से उन्हें दी गई वसीयत के अनुसार उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार प्राप्त है। धर्मस्व विभाग की ओर से अधिवक्ता भुक्या माँगीलाल नायक ने दलील देते हुए कहा कि श्रीकिशन अग्रवाल केवल एक पुजारी थे।
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माँगीलाल ने कहा कि सरकार ने 1989 में इस भूमि को धर्मस्व विभाग की भूमि घोषित करते हुए अधिसूचना जारी की थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद खण्डपीठ ने दीवानी न्यायालय के आदेशों को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
खण्डपीठ ने कहा कि उसने इस याचिका के संबंध में योग्यता के मामले पर विचार किया और अतीत में नहीं गई। यदि कोई आपत्ति हो तो धर्मस्व विभाग के न्यायाधिकरण से संपर्क कर सकते हैं और न्यायाधिकरण को आदेश दिया गया कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर विचार किए बिना निर्णय लिया जाए।
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