साठ दिन का है इस वर्ष ज्येष्ठ मास
तिथि मुहूर्त
विक्रम पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास 2 मई, शनिवार से शुरु होगा, जो 29 जून, सोमवार को समाप्त होगा।
पुरुषोत्तम मास
17 मई, रविवार को शुरु होगा, जो 15 जून, सोमवार तक रहेगा।
अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ मास का आरंभ 2 मई, शनिवार से होने जा रहा है। इस बार ज्येष्ठ मास एक महीने का नहीं बल्कि 60 दिन यानी दो महीने का होगा, क्योंकि ज्येष्ठ मास में अधिक मास का संयोग बना रहा है। बता दें कि हर तीन साल में एक बार अधिक मास पड़ता है। इस बार अधिक मास लगने के कारण ज्येष्ठ मास 2 महीने का होगा। मान्यता है कि ज्येष्ठ महीने में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है। इस महीने में दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करने का विशेष महत्व है।
पुरुषोत्तम मास
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह के स्वामी भगवान विष्णु हैं और भगवान विष्णु का एक नाम पुरुषोत्तम भी है, इसलिए इस माह को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप-तप का दोगुना फल व्यक्ति को मिलता है।
ज्येष्ठ बड़ा मंगल
ज्येष्ठ माह में हर मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है। इस साल अधिक मास के कारण ज्येष्ठ माह 60 दिन का होगा। यही कारण है कि इस बार ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल पड़ेंगे। ज्योतिषविदों की मानें तो ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल का संयोग 19 साल बाद बन रहा है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के बड़े मंगल पर बजरंगबली की उपासना करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
ज्येष्ठ मास और पुरुषोत्तम मास के कृत्य
इस बार ज्येष्ठ मास के साथ पुरुषोत्तम मास लगने से जप-तप आदि कार्य करने का दोगुना फल मिलेगा। ज्येष्ठ मास में तीर्थ यात्रा करने का विशेष महत्व बताया गया है। पवित्र नदियों में स्नान करना भी शुभ फलदायी रहता है। ऐसा करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस महीने में हनुमान जी की के साथ भगवान विष्णु की भी रोज पूजा करनी चाहिए।
इस महीने में रोज श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। भगवान विष्णु के सामने सुबह-शाम घी का दीपक जलाएं। इसके अलावा गीता और विष्णु पुराण का पाठ भी आप कर सकते हैं। ऐसे करने से घर में सकारात्मकता आती है। इस दौरान पानी का दान करना बेहद ही शुभ फलदायी माना जाता है। पशु-पक्षियों के लिए खाने और पानी का इंतजाम करें।
निषेध कार्य
ज्येष्ठ मास में दिन के समय न सोएं। मान्यता है कि दिन में सोने से भाग्य कमजोर हो जाता है। इस महीने में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। पानी को व्यर्थ में न बर्बाद करें। पानी की बर्बादी से वरुण देव नाराज होते हैं, जिससे आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
तामसिक भोजन से परहेज करें। मांस, शराब, लहसुन, प्याज जैसे तामसिक चीजों से परहेज करें। इनके सेवन से मन अशांत रहता है। ज्येष्ठ मास में शादी करने से परहेज करना चाहिए। अगर घर में कोई बच्चा सबसे बड़ा है तो उसका विवाह इस समय नहीं करना चाहिए।
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