श्रीकृष्ण के उपदेश को आत्मसात करने का पर्व

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान दिया था यानी रणक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। जिस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था, उस दिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि थी।
इसलिए इस तिथि पर गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है।पूजा विधि गीता जयंती के मौके पर सुबह स्नान करके पूजाघर को साफ करें। भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान श्रीकृष्ण के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, पीले रंग की मिठाई आदि का भोग लगाएं।
भगवद्गीता का पाठ करें। इस ग्रंथ के 12वें और 15वें अध्याय को जरूर पढ़ें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप करें। अंत में भगवान को प्रणाम करके पूजा में होने वाली भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
भगवान कृष्ण के मंत्र* कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतःक्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। कुं कृष्णाय नमः ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवायः देवीकीनंदनाय विदमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयातः ।
क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः।इनमें से किसी भी मंत्र का जप गीता जयंती के मौके पर कम से कम 108 बार जरूर करें ताकि आप पर भी भगवान कृष्ण की कृपा सदैव बनी रहे। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान दिया था।
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