राष्ट्रपति ‘एट होम’ निमंत्रण पर पूर्वोत्तर संस्कृति की झलक

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नयी दिल्ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे जाने वाले गणतंत्र दिवस ‘एट होम’ निमंत्रण में इस वर्ष अष्टलक्ष्मी कहे जाने वाले पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की संस्कृति व कला प्रदर्शित की गई है। निमंत्रण के अनुसार, मेहमानों का स्वागत पारंपरिक तरीके से खासतौर पर डिजाइन किए गए ‘एरी सिल्क शॉल’ से किया जाएगा।

पीस सिल्क’ या ‘अहिंसा सिल्क’ कहे जाने वाला एरी रेशम पूर्वोत्तर भारत की वस्त्र परंपरा और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नगालैंड के राजकीय पशु मिथुन और रोडोडेंड्रन फूल, मणिपुर की शिरुई लिली और सांगई हिरण, त्रिपुरा का नागकेसर फूल व इंडियन बटर कैटफिश, और मिजोरम की रेड वांडा ऑर्किड और हिमालयन सेरो पूर्वोत्तर क्षेत्र की वनस्पति और जीवजंतुओं को इन शॉल पर प्रदर्शित किया गया है।

निमंत्रण पत्र में पारंपरिक पूर्वोत्तर कला और डिजाइन दिखाई दिए

‘एट होम’ समारोह के लिए हस्तनिर्मित निमंत्रण बॉक्स में बांस का उपयोग किया गया है। यह तकनीक त्रिपुरा राज्य में सामान्यतः उपयोग की जाती है। राष्ट्रपति भवन में 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस उत्सव के दौरान देश भर के सम्मानित मेहमानों का स्वागत किया जाएगा।

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राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी), अहमदाबाद द्वारा तैयार किए गए निमंत्रण पत्र में लिखा है, “हम आपको भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।” निमंत्रण पत्र पर अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की पारंपरिक कारीगरी प्रदर्शित की गई है, जिसे शिल्पकारों और परियोजना टीम के बीच सहयोगात्मक संवाद के माध्यम से विकसित किया गया है।

शिल्पकारों समेत 350 से अधिक सदस्यों की टीम का नेतृत्व करने वाली प्रोफेसर एंड्रिया नोरोन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र तक पहुंचना आसान नहीं है, और इसलिए कई दूरस्थ शिल्प केंद्रों तक पहुंचना एक चुनौती थी। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, एनआईडी के क्षेत्र में दशकों तक काम करने के अनुभव और हमारे नेटवर्क में मौजूद पुराने छात्रों के योगदान के कारण, इस कार्य को निर्धारित कड़ी समयसीमा के अंदर संपन्न किया।” (भाषा) 

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