तिरुमाला में प्रसाद की खराब गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर

हैदराबाद, हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि तिरुमला श्रीवारी मंदिर में प्रसाद और प्रसाद बनाने में देसी गाय का घी और गुणवत्ता स्तरीय सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खंडपीठ ने मंगलवार को रजिस्ट्री द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर सुनवाई पूरी की और याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया।

खंडपीठ ने घोषणा की कि उसका निर्णय बाद में घोषित किया जाएगा। युग तुलसी फाउंडेशन के अध्यक्ष के. शिवकुमार और अन्य ने एक जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि आगम शास्त्र के अनुसार नैवेद्यम (प्रसाद) की कोई तैयारी नहीं का जा रही है। रजिस्ट्री ने याचिका पर नंबर आवंटित करने पर आपत्ति जताई।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सुशील राम ने तर्क दिया कि रजिस्ट्री की आपत्तियों को खारिज कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो हो रहा है वह अतीत में टीटीडी बोर्ड द्वारा पारित प्रस्तावों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अब जो हो रहा है वह बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्तावों के भी विपरीत है जब याचिकाकर्ता तिरुमला देवस्थानम शासी परिषद का सदस्य था। पीठ द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि इस मामले में क्या और कैसे करना है, इसके विस्तृत विवरण के साथ एक ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मौखिक रूप से अपील की थी। उन्होंने कहा कि भक्तों की आस्था की रक्षा की जानी चाहिए। पीठ ने घोषणा की कि वह रजिस्ट्री की आपत्तियों पर बाद में उचित आदेश जारी करेगी।

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