रमा एकादशी व्रत करने से सभी पापों का होता है क्षय
तिथि मुहूर्त
पाम पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि कल सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरु हो चुकी है, जो आज सुबह 11 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार यह व्रत आज रखा जाएगा।
व्रत पारण
रमा एकादशी व्रत का पारण 18 अक्तूबर, शनिवार को सुबह 6 बजकर 24 मिनट से सुबह 8 बजकर 41 मिनट तक किया जाएगा।
हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। हर महीने में दो एकादशी तिथियां पड़ती हैं, जिनका सबका अपना विशेष महत्व है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। यह व्रत मां लक्ष्मी और श्रीहरि भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। रमा एकादशी का व्रत दिवाली से पहले पड़ता है।
पूजा विधि
रमा एकादशी की सुबह स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। पूजा-स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। श्रीहरि को चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप और दीप अर्पित करें। इस दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। श्रीसूक्त या विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का इस दिन विशेष महत्व माना गया है।
शास्त्रां के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हजार अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन के सभी पापों का नाश होता है। रमा एकादशी को अनाज, प्याज, लहसुन और सरसों के तेल का सेवन वर्जित होता है। दिन भर व्रत रखकर महिलाएं शाम को भगवान विष्णु की पूजा करती हैं और रमा एकादशी की कथा सुनती हैं। अगले दिन शुभ मुहूर्त में जल अर्पित करके व्रत खोला जाता है।
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालष्म्यै नम।
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