एपीआई-एमएससी द्वारा 29 अगस्त राष्ट्रीय खांसी दिवस के रूप में घोषित
हैदराबाद, एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया-महाराष्ट्र स्टेट चैप्टर द्वारा डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड के सहयोग से 29 अगस्त को `राष्ट्रीय खांसी दिवस’ (नेशनल कफ डे) घोषित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारत में खांसी जैसी स्वास्थ्य के बारे में व्यापक जागरूकता तथा साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
आज यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल के अनुसार भारत में लगभग 30 प्रतिशत मरीजों ने स्वास्थ्य समस्या को लेकर खांसी को दूसरा सबसे आम लक्षण बताया। मानकीकृत नैदानिक दिशा-निर्देशों के अभाव के कारण अनुचित उपचार व्यापक रूप से प्रचलित हैं। इस परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय खांसी दिवस की शुरुआत करके एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया-एमएससी का उद्देश्य वैश्विक दवा कंपनी डॉ.रेड्डीज के सहयोग से स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के बीच साक्ष्य आधारित प्रथाओं को बढ़ावा तथा रोगी परिणामों में सुधार लाना है। साथ ही इस अनूठी पहल का उद्देश्य खांसी पर देशव्यापी संवाद स्थापित करते हुए मरीजों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के बीच जागरूकता बढ़ाते हुए साक्ष्य आधारित निदान और उपचार पद्धतियों को प्रोत्साहन भी देना है।
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बेहतर नैदानिक परिणाम सुनिश्चित करना लक्ष्य
एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया-एमएससी के मानद संयुक्त सचिव डॉ. अगम वोरा ने कहा कि लंबे समय से खांसी को कमतर स्वास्थ्य समस्या माना जाता रहा है। जिसका अक्सर वैज्ञानिक उपचार के बजाय लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खांसी दिवस के माध्यम से हमारा उद्देश्य भारत में खांसी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण अंतर को पाटना और चिकित्सकों को साक्ष्य आधारित दिशानिर्देशों से लैस करना है। जिससे लक्षणों के आधार पर विभिन्न प्रकार की खांसी की शीघ्र पहचान और निदान संभव हो सके। साथ ही बेहतर नैदानिक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सीडीएससीओ अनुमोदित एफडीसी के साथ उपचार शुरू किया जा सके।
कंसल्टेंट फिजिशियन एवं डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. मंगेश तीवस्कर ने कहा कि राष्ट्रीय खांसी दिवस एक दूरदर्शी पहल है। यह चिकित्सकों सहित सभी हितधारकों को खांसी के प्रबंधन के तरीकों पर पुनर्विचार करने के लिए एकजुट करने में सहायक सिद्ध होगी। उम्मीद है कि इस पहल से लाखों रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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