सूत्र-वाक्य

धर्म, व्यक्ति एवं समाज, दोनों के लिये आवश्यक है।
– डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
रामायण समस्त मनुष्य जाति को अनिर्वचनीय सुख और शांति पहुंचाने का साधन है।
-मदनमोहन मालवीय
संसार में ऐसे अपराध कम ही हैं, जिन्हें हम चाहें और क्षमा न कर सकें।
– शरतचंद्र चट्टोपाध्याय
जैसे सूर्योदय के होते ही अंधकार दूर हो जाता है, वैसे ही मन की प्रसन्नता से सारी बाधाएं शांत हो जाती हैं।
– अमृतलाल नागर
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