जीव हिंसा से बचने में रखें सावधानी : साध्वी सुमंगलप्रभाजी

हैदराबाद, मार्ग में चलते समय बहुत ही ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि मार्ग में सूक्ष्म जीव होते हैं और हमसे जीव हिंसा हो सकती है। जितना हो सके जीवों की रक्षा करने का प्रयास करें। उक्त उद्गार सिकंदराबाद मारुति विधि जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने दिये।

पूज्यश्री ने कहा कि महावीर के निर्वाणोत्सव में परमात्मा की अंतिम वाणी उत्तराध्ययन के मूल पाठ का सारांश चल रहा है। इसमें बताया गया है कि पाप श्रमण कौन होते हैं। वे साधु जो खा पीकर सो जाते हैं, अपने सद्गुरु व बड़ों की विनय भक्ति नहीं करते, जो समय पर ध्यान पर नहीं करते, परिमार्जन के कार्य नहीं करते, मायाचार कलह करते हैं, ऐसे साधु को पाप श्रमण कहा गया है।

म.सा. ने कहा कि मुनि जब विहार या विचरण करते हैं तो वे नीचे देखकर चलते हैं ताकि जीव जंतु की रक्षा हो सके। अन्यथा उतावले दौड़ते हुए चलें तो जीव जंतु का रास्ते में बचाव नहीं होगा। म.सा. ने कहा कि मार्ग में चलते समय बहुत ही ध्यान रखने की जरूरत है। इससे हम जीव हिंसा से बच सकते हैं। सभा का संचालन करते हुए संघ के विमल पितलिया ने बताया कि 5 घंटे का जाप सुचारू रूप से चल रहा है।

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अध्यक्ष गौतमचंद गुगलिया ने बताया कि सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक उत्तराध्ययन सूत्र वाचन के पश्चात विवेचना की गई। आज अल्पाहार के लाभार्थी सुशील, सुनील, अनिल बोहरा परिवार एवं गौतमचंद, अभय कुमार, राकेश तातेड़ परिवार रहा। महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि वंदना मासखमन में अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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