भारतजेन और आईआईटी बॉम्बे ने ट्रिलियन पैरामीटर एआई ‘मदर मॉडल’ की शुरुआत की
हैदराबाद, आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व में भारतजेन ने देश के पहले बहुभाषी ‘मदर मॉडल’ के रूप में एक ट्रिलियन पैरामीटर वाले विशाल भाषा मॉडल (एलएलएम) पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत 900 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इस विशाल मॉडल को आधार बनाकर कानून, कृषि और वित्त जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए छोटे और प्रभावी मॉडल तैयार करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीधे उपभोक्ताओं के लिए इतना बड़ा मॉडल आवश्यक नहीं है, बल्कि इसे “मदर सिस्टम” के रूप में उपयोग करके हल्के और तेज मॉडल बनाए जाएंगे, जिन्हें किसान, वकील और अन्य पेशेवर अपने-अपने क्षेत्रों में आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
भारतजेन का कहना है कि इस मॉडल को तैयार करने के लिए विशेष रूप से भारतीय भाषाओं और संदर्भों पर आधारित डेटा एकत्रित किया जा रहा है। इसके लिए प्रकाशकों के साथ साझेदारी कर पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण, क्षेत्रीय ग्रंथों को ओसीआर तकनीक से डिजिटल रूप देना और भीड़ आधारित एनोटेशन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मॉडल भारतीय भाषाई और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को सही ढंग से प्रतिबिंबित करे।
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भारतीय भाषाओं पर आधारित सशक्त एआई इकोसिस्टम योजना
ट्रिलियन पैरामीटर वाले इस मॉडल के प्रशिक्षण के लिए हजारों जीपीयू की आवश्यकता होगी। सरकार ने इस मिशन के अंतर्गत लगभग 40,000 जीपीयू उपलब्ध कराने की घोषणा की है। फिलहाल भारतजेन का ध्यान हार्डवेयर संरचना तैयार करने, विश्वसनीय डेटा एकत्र करने और वास्तविक जीवन की जरूरतों के अनुरूप मजबूत मॉडल बनाने पर केंद्रित है।
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन और कार्यकारी उपाध्यक्ष ऋषि बाल के अनुसार, भारतजेन केवल पैमाने पर प्रतिस्पर्धा नहीं करना चाहता, बल्कि भारतीय भाषाओं और डेटा पर आधारित विश्वसनीय समाधान देना चाहता है। इसके तहत भविष्य में छोटे और विशिष्ट मॉडल डेवलपर इकोसिस्टम को उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि स्टार्टअप और कंपनियां उन पर आधारित एप्लिकेशन विकसित कर सकें।
भारतजेन हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें देशभर के इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और क्षेत्र विशेषज्ञ शामिल हैं। परियोजना को सार्वजनिक-निजी साझेदारी और छोटे मॉडल के लाइसेंसिंग जैसे राजस्व मॉडल से आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल तकनीकी रूप से भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगी बल्कि भारतीय भाषाओं और संदर्भों पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक सशक्त इकोसिस्टम भी तैयार करेगी।
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