आम आदमी का बजट

2026 सिर्फ बसंसद में पढ़ा गया एक आर्थिक दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह उस आम आदमी की कहानी है, जो हर महीने की पहली तारीख को अपने खर्च और सपनों का हिसाब लगाता है। इस बजट में सरकार ने यह संदेश साफ़ दिया है कि विकास की रफ्तार तभी सार्थक है जब उसका असर रसोई, जेब और रोज़गार तक पहुँचे। इसीलिए बजट 2026 में बड़े शब्दों के साथ-साथ ज़मीनी ज़रूरतों को भी जगह मिली है।

इस बार बजट का एक बड़ा फोकस मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों पर दिखाई देता है। आयकर व्यवस्था को और सरल बनाने की कोशिश की गई है, ताकि टैक्स भरना बोझ नहीं, बल्कि एक सहज प्रक्रिया बने। टैक्स स्लैब में संतुलन और कुछ अतिरिक्त राहत से उन परिवारों को फायदा मिल सकता है जो महँगाई के दबाव में अपनी बचत घटते हुए देख रहे थे। इसका सीधा असर यह होगा कि हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा बचेगा, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य या भविष्य की योजनाओं में लगाया जा सकेगा। बजट 2026 में बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर एक बार फिर साफ़ नज़र आता है।

किसानों के लिए आधुनिक खेती और आय बढ़ाने पर जोर

सड़कें, रेल, शहरी परिवहन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन सब पर निवेश का मतलब है सिर्फ कंक्रीट नहीं, बल्कि रोज़गार के नए अवसर। जब कहीं सड़क बनती है या रेल लाइन बिछती है, तो उसके साथ मज़दूर को काम मिलता है, छोटे दुकानदार की कमाई बढ़ती है और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में जान आती है। आम आदमी के लिए इसका अर्थ है बेहतर कनेक्टिविटी और कम समय में ज़्यादा काम। किसानों के लिए बजट 2026 उम्मीद की नई फसल लेकर आया है। कृषि को आधुनिक बनाने, तकनीक से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।

सिंचाई, भंडारण और बाज़ार तक सीधी पहुँच जैसे उपाय किसानों बिचौलियों को की निर्भरता से कुछ हद तक मुक्त कर सकते हैं। जब किसान मज़बूत होगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी और इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। महँगाई से जूझ रही आम जनता के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी घोषणाएँ भी राहत देने वाली हैं। ज़रूरी दवाइयों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की कोशिशें यह संकेत देती हैं कि सरकार भविष्य की पीढ़ी में निवेश को प्राथमिकता दे रही है।

सस्ती दवा और स्वास्थ्य सुविधा से बड़ी राहत

एक बीमार परिवार ही जानता है कि सस्ती दवा और नज़दीकी इलाज कतनी बड़ी राहत हो सकती है। महिला सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास को भी बजट 2026 में विशेष महत्व दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और स्किल-आधारित कार्यक्रमों के ज़रिए महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सोच साफ़ झलकती है। जब घर की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है और युवा को रोज़गार मिलता है, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है।

डॉ. अनुराधा जाजू

कुल मिलाकर, बजट 2026 किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संतुलित विकास की कोशिश है। इसमें सपने भी हैं और ज़िम्मेदारी भी। यह बजट यह भरोसा दिलाने की कोशिश करता है कि अगर मेहनत और नीति साथ-साथ चलें, तो आम आदमी की ज़िंदगी में भी बदलाव मुमकिन है। शायद यही वजह है कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि उम्मीदों का बजट बनकर सामने आता है।

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