गीता परिवार का बाल संस्कार शिविर आरंभ

हैदराबाद, गीता परिवार का गीता बाल संस्कार शिविर मोइनाबाद स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल में भव्यता के साथ आरंभ हुआ। शिविर का समापन 10 मई को होगा।

श्री स्वामीनारायण गुरुकुल में शिविर का उद्घाटन स्वामीनारायण गुरुकुल के पूज्यपाद महंत स्वामी देवप्रसाददासजी स्वामी, चिलकूर बालाजी मंदिर के प्रमुख वैदिक विद्वान सी.एस. रंगाराजन के सान्निध्य में सम्माननीय अतिथि सुप्रसिद्ध समाजसेवी अमृत कुमार जैन एवं समारोह अध्यक्ष गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरिनारायण व्यास, शिविर संयोजक अरुण गौड़ द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। अवसर पर बच्चों द्वारा गीता के श्लोक प्रस्तुत किये गए। अतिथियों का सम्मान तुलसी के पौधों के साथ किया गया।

देवप्रसाददासजी महाराज ने कहा कि गीता परिवार के स्वामी गोविन्ददेव गिरीजी का आशीर्वाद गुरुकुल पर रहा है। अभिभावक सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने बच्चों को शिविर में भेजने का निर्णय लिया। गीता परिवार के शिविर की घोषणा के साथ ही एक घंटे में पंजीकरण फुल हो जाता है। इसलिए जो शिविर में आये हैं, वह बहुत भाग्यशाली हैं। बच्चों का जीवन कोरे कागज के समान होता है।

इस उम्र में जो भी मनस पटल पर लिख दें, वह उनके जीवन में काम आता है। बड़ों को समझाना बहुत ही मुश्किल होता है। बच्चे भगवान का रूप हैं। उनमें संस्कार डालना पुण्य की बात है। गीता परिवार 40 साल से यह कार्य कर रहा है। गीता परिवार जो देश-विदेश में गीता अध्ययन का कार्य कर रहा है, वह सराहनीय है। यह विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ है। गीता की सेवा करना बड़ी बात है।

गुरुकुल में बच्चों के संस्कार और शिक्षा पर जोर

गीता परिवार हैदराबाद का जब भी शिविर होता है, वह स्वामी नारायण गुरुकुल को ही पसंद करते हैं। गुरुकुल हमेशा अच्छे कार्य के लिए उपयोग होता है। गीता परिवार व कार्यकर्ता का आभार व्यक्त करते हैं, जो छोटे बच्चों को संभालने का कार्य कर रहे हैं। बच्चों को या तो भगवान संभाल सकते हैं या गीता परिवार वाले। गीता परिवार एवं गुरुकुल एक ही तरह हैं, जो संस्कार पोषण का कार्य करते हैं।

चिलकुर बालाजी मंदिर के प्रमुख सी.एस. रंगराजन ने कहा कि शिविर में बच्चे दो महान संस्थान के बीच में है। एक तरफ सबसे पुराने चिलकुर बालाजी मंदिर एवं दूसरी तरफ 31 वर्ष पुराना स्वामीनारायण गुरुकुल है, जहाँ बाल संस्कार दिये जा रहे हैं। गुरुकुल में जो कुछ भी सीखता है, वह जीवन में बहुत बड़ा बनता है। परमात्मा व चिलकुर बालाजी का बच्चों पर आशीर्वाद रहेगा। बच्चों को चिलकुर बालाजी मंदिर में विशेष दर्शन की व्यवस्था बुधवार, 6 मई को शाम 5 बजे गीता परिवार द्वारा की गई है। बच्चे दर्शन के बाद गीता पाठ करेंगे।

समाजसेवी अमृत कुमार जैन ने कहा कि गीता परिवार हैदराबाद व स्वामीनारायण गुरुकुल में बहुत ही अच्छा शिविर चलाया गया है। जिस प्रकार सोने के आग में तपने के बाद उसमें निखार आता है, वैसे ही एक सप्ताह के बाद अभिभावक बच्चों के जीवन में संस्कार देखेंगे। यह संस्कार शिविर बहुत ही शानदार, जानदार है। इससे जीवन में संस्कार और परिवर्तन अवश्य आयेगा। बच्चों को वर्तमान में पढ़ाई के साथ संस्कार भी आवश्यक है।

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अभिभावकों से उद्घाटन तक रुकने का आग्रह

इसलिए शिविर बच्चों के लिए बहुत ही आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गीता परिवार के राष्ट्रीय प्रमुख हरिनारायण व्यास ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हर बार शिविर में अभिभावक बच्चों को बाहर से ही छोड़कर चले जाते हैं, लेकिन इस बार उन्हें उद्घाटन के समय तक ठहरने को कहा गया, क्योंकि काफी वर्षों के बाद देवप्रसाददासजी स्वामी कार्यक्रम में उपस्थित हुए। यह सभी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि गीता परिवार की दक्षिण में शाखाएँ बढ़ती जा रही हैं।

गीता परिवार 39 वर्ष से प्रत्येक वर्ष एक राष्ट्रीय पुरस्कार उसे प्रदान करता है, जिन्होंने अद्भुत सेवा की हो। गत वर्ष यह स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय पुरस्कार चिलकुर बालाजी के प्रमुख रंगराजनजी को प्रदान किया गया। चिलकुर बालाजी मंदिर में हर किसी को दर्शन की अनुमति है। यहाँ सभी को पंक्तिबद्ध होकर दर्शन करना होता है। उन्होंने कहा कि गीता परिवार एवं स्वामी नारायण गुरुकुल दोनों एक ही हैं, केवल नाम का अंतर है। दोनों ही बच्चों में संस्कार का पोषण करने का कार्य करते हैं।

हरिनारायण व्यास ने कहा कि गीता परिवार का यह शिविर 24 वर्ष से चल रहा है। शिविर में 200 बालक-बालिकाओं को लिया जाता है। सात दिन बाद जब आप बच्चों से मिलेंगे, तो उनके जीवन में बदलाव अवश्य देखेंगे। शिविर का समापन 10 मई को शाम 5 बजे होगा। हरिनारायण व्यास ने कहा कि गीता परिवार 40 वर्ष में देश ही नहीं, बल्कि 192 देशों में गीता अध्ययन का कार्य कर रहा है। यह अगले वर्ष 40 लाख लोगों तक पहुँचे, इसका प्रयास किया जा रहा है।

गीता परिवार 400 जिलों में सक्रिय, बड़ा नेटवर्क

देश के 600 में 400 जिलों में गीता परिवार कार्य कर रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ है, जो ऑनलाइन माध्यम से गीता सिखाने के लिए कार्य कर रहा है। ऑनलाइन गीता में प्रतिदिन 3886 जूम कक्षाएँ होती है, जिसमें 14 भाषाओं में गीता सिखाई जाती है। इसके लिए 17,000 कार्यकर्ता निःशुल्क सेवा देते हैं। सारे साधक जो गीता सीखते हैं, वही गीता सिखाते हैं। स्वामी गोविंद देवगिरीजी से चर्चा कर गीता परिवार का 25वाँ रजत जयंती कार्यक्रम स्वामी नारायण गुरुकुल में आगामी दिसंबर माह में किया जाएगा। इसमें भाग लेने हेतु देवप्रसाददासजी महाराज से भी विशेष तौर पर आग्रह किया गया है। इसमें अखिल भारतीय स्तर पर बच्चे भाग लेंगे, जिसके लिए स्वामीजी ने स्वीकृति प्रदान की है।

शिविर संयोजक अरुण गौड़ ने कहा कि शिविर कल, मंगलवार से आरंभ होगा। इसमें भगवत भक्ति, कथाएँ, योग प्राणायाम, भजन कीर्तन, विभिन्न खेलकूद, संस्कार चलचित्र आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। गीता परिवार के मुख्यालय संगमनेर से योग प्रशिक्षक दत्ता भांडुरकर के नेतृत्व में शिक्षक दल बच्चों को प्रशिक्षण देंगे। सुबह 5 से रात 9.30 बजे तक शिविर संचालित होगा। इसमें नाश्ता, दोपहर भोजन, हाई टी और रात्रि भोजन की व्यवस्था की जाएगी। अभिभावक से निवेदन है कि वह बच्चों को सात दिन तक फोन न करें, ताकि बच्चा होम सिक न हो। गीता परिवार, हैदराबाद के मंत्री गौरव हेडा ने कार्यक्रम का संचालन किया। उपाध्यक्ष निरंजन रेड्डी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

अवसर पर रमेश असावा, सुनीता दरक, कल्पना दरक, प्रतीक मालू, गीता परिवार हैदराबाद अध्यक्ष श्रद्धा राव देव, उपाध्यक्ष निरंजन रेड्डी, मंत्री गौरव हेडा, सह-मंत्री आरती भांगड़िया, कोषाध्यक्ष दिलीप धूत, प्रचार मंत्री श्रद्धा कासट ने सहयोग प्रदान किया।

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