लड़कियों ने खुद प्रशासन के पास पहुँचकर रुकवाई अपनी शादी
बूंदी, बूंदी जिले में दो नाबालिग लड़कियों ने खुद ही अपना बाल विवाह रुकवाकर बहादुरी की मिसाल पेश की है। दोनों की शादी 10 फरवरी को होने वाली थी। एक लड़की की उम्र 17 साल है तो दूसरी की उम्र 16 साल है। दोनों ही लड़कियां 12वीं की छात्राएँ हैं।
17 वर्षीय लड़की ने तालेड़ा के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राजेश टेलर के दफ्तर पहुंचकर अपनी शादी को रोकने के लिए मदद मांगी। इसके जवाब में टेलर ने निषेधाज्ञा के ऑर्डर जारी कर बाल विवाह रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी। लड़की के माता-पिता और परिवार के सदस्यों को दफ्तर बुलाया गया, जहां उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों और उसके गंभीर परिणामों के बारे में बताया गया।
मामले में बूंदी बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि निषेधाज्ञा के ऑर्डर (पाबंदी का आदेश) जारी कर दिए गए हैं, लड़की के अभिभावकों को 18 वर्ष की होने तक उसकी शादी करने से रोका जाएगा। लड़की को उसकी सुरक्षा के लिए सरकारी शेल्टर होम में भेज दिया गया है।
दूसरे मामले की बात करें तो 16 वर्षीय एक लड़की ने सीडब्ल्यूसी से संपर्क कर अपनी शादी को रोकने की गुहार लगाई थी। ये शादी 10 फरवरी को होने वाली थी। शादी भीलवाड़ा जिले के 20 वर्षीय युवक से होनी थी। लड़की ओपन स्कूलिंग के जरिए 12वीं में पढ़ रही है। जब माता-पिता को पता चला कि बेटी ने सीडब्ल्यूसी अधिकारियों से संपर्क किया है तो शादी को एक दिन पहले यानी 9 फरवरी को करवाने की योजना थी। यही नहीं उन्होंने लड़की को कहीं और ले जाने की भी कोशिश की। हालांकि सीडब्ल्यूसी ने पुलिस की मदद से त्वरित कार्रवाई कर लड़की का पता लगा लिया और शादी की तारीख तक देखभाल और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से उसे अपने पास रख लिया है।
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