एडवांस फीस वसूली पर मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख

हैदराबाद, तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्कूलों द्वारा ली जाने वाली एडवांस फीस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। आज जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जस्टिस डॉ. शमीम अख्तर की अध्यक्षता वाले आयोग ने बोडुप्पल के एक निजी स्कूल के खिलाफ दर्ज शिकायत का संज्ञान लिया, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए वार्षिक शुल्क का पचास प्रतिशत हिस्सा और किताबों व यूनिफॉर्म के पैसे अग्रिम रूप से वसूलने का आरोप लगाया गया था।
शिक्षा अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है
आयोग ने इस प्रथा को अनुचित तथा शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने वाले कानूनी सिद्धांतों के विरुद्ध करार दिया। आयोग द्वारा कहा गया कि शिक्षा अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसे मुनाफाखोरी का जरिया नहीं बनाया जा सकता। अभिभावकों पर पड़ने वाले अनुचित वित्तीय बोझ और विशिष्ट विक्रेताओं से ही सामान खरीदने की बाध्यता पर चिंता जताते हुए आयोग ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ करार दिया है।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने मेड़चल-मल्काजगिरी के जिला शिक्षा अधिकारी को ऐसे स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही कि फीस का संग्रह नियमानुसार चरणों में ही किया जाए। इसके अलावा आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत आयोग ने निर्धारित समय के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी है।
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