हैदराबाद : सरकार ने मूसी रिवरफ्रंट के लिए लोगों से माँगी ज़मीन

हैदराबाद, मूसी रिवरफ्रंट के लिए निजी जमीनों की आवश्यकता पड़ेगी। यही कारण है कि सरकार ने ऐसी जमीनों की पहचान करनी शुरू कर दी है। यह बात मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमआरडीसीएल) द्वारा जारी एक अधिसूचना से पता चली है। अधिसूचना में 55 किमी के कॉरिडोर के शुरुआती दो हिस्सों के लिए ज़मीन मालिकों को मर्ज़ी से अपनी ज़मीन देने के लिए कहा गया है।

जमीन देने वाले लोगों को इसके बदले ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स मिलेंगे, यानि उन्हें कहीं और निर्माण की अनुमति होगी। यह अधिसूचना उन सभी ज़मीन मालिकों के लिए है, जिनकी ज़मीन मूसी नदी के एमएफएल/ब़फर ज़ोन में आती है। उन्हें अपनी मर्ज़ी से ज़मीन सरेंडर करने के बदले (टीडीआर) का फ़ायदा उठाने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया है।

यह परियोजना गंडीपेट से गौरेली तक फैली हुई है। यह रंगारेड्डी, हैदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों के 14 मंडलों के 46 गाँवों से होकर गुजरती है। अधिकारियों ने नदी के दोनों छोरों पर 50 मीटर के बफर के भीतर विकास का प्रस्ताव दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह प्रयास स्वच्छता की स्थिति/पर्यावरण में सुधार करने के साथ ही मूसी नदी के 55 किलोमीटर के हिस्से का कायाकल्प करने के साथ-साथ पारिस्थितिकी बहाल करने की कोशिश है।

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वर्तमान अधिसूचना में चरण 1ए यानि हिमायतसागर से गांधी सरोवर तक और चरण 1बी यानि उस्मान सागर से गांधी सरोवर तक, जिसमें बापू घाट खंड भी शामिल है, को कवर किया गया है। दरगाह कालिसकन, किस्मतपुर, बंगलागुड़ा जागीर, गंडीपेट, नारसिंगी, बुदवेल, उप्परपल्ली, मंचिरेवुला, इब्राहिम बाग, कुली कुतुब शाह, गंधमगुड़ा, हैदर शाहकोट और बंडलागुड़ा जैसे गांवों के लिए विस्तृत सर्वेक्षण सूचीबद्ध हैं। मुआवजा यह देखकर दिया जाएगा कि भूमि को कैसे वर्गीकृत किया गया है।

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