लीज पर भूमि देने का आईडीपीएल को अधिकार नहीं : कोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए आईडीपीएल (इंडियन ड्रग्स एण्ड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड) को आवंटित भूमि लीज पर देने का अधिकार आईडीपीएल को नहीं है। औषधीय उद्योग के प्रोत्साहन के तहत औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए आवंटित भूमि से संबंधित भवन लीज पर देने का निर्णय अमान्य है। भूमि अधिग्रहित करते हुए ज़िलाधीश द्वारा की गई प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए बीआईएफआर (बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रीयल एण्ड फाइनेंशियल रि-कंस्ट्रक्शन) द्वारा वर्ष 2008 में जारी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए मंगलवार को उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी किया।

वर्ष 2008 में बीआईएफआर द्वारा जारी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि औषधीय उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 1994 में राज्य सरकार ने 891.38 एकड़ भूमि समझौते के तहत स्थानांतरित करते हुए आवंटित की।

स्थानांतरण संबंधी समझौते में आवंटित भूमि का दुरुपयोग न करने, स्थानांतरित न करने और अन्य कार्यों के लिए लीज पर न देने की शर्त रखी गई थी। लेकिन इसके विपरीत बालानगर स्थित प्रशासनिक भवन लीज पर देने के लिए आईडीपीएल ने निजी कंपनी से निविदाएँ आमंत्रित करते हुए विज्ञापन जारी किया है। इस बात की जानकारी मिलने पर ज़िलाधीश ने आईडीपीएल को आवंटित भूमि का अधिग्रहण कर टीजीआईआईसी को सौंपने के लिए उप-ज़िलाधीश और तहसीलदार को गत 27 जनवरी, 2008 को आदेश जारी किए। आदेश के चलते भूमि का अधिग्रहण कर इसे टीजीआईआईसी को सौंप दिया गया।

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केंद्र ने कहा, याचिका सुनवाई योग्य नहीं

दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पी. नरसिम्हा शर्मा ने दलील देते हुए बीआईएफआर द्वारा जारी आदेश की राज्य सरकार को जानकारी है। बीआईएफआर रद्द होने पर उसके स्थान पर दीवाला संस्कृति का आविर्भाव होने के कारण एनसीएलटी की शरण लेनी होगी। इसीलिए दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि भूमि स्थानांतरण संबंधी समझौते के अनुसार, राज्य सरकार ने यह भूमि केवल औद्योगिक प्रयोजनों वह भी औषधीय उद्योग मात्र के लिए उपयोग करने की अनुमति दी है। इसमें लीज के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है।

औषधीय उद्योग के लिए मंजूर की गई भूमि अन्य कार्यों के लिए लीज पर देने का अधिकार नहीं दिया गया है। आईडीपीएल को आवंटित भूमि पर निजी लेन-देन जैसा अधिकार, मनमर्जी निर्णय लेने की स्वेच्छा रहने के बावजूद भी राज्य सरकार को हस्तक्षेप करने का हक नहीं है और दलील स्वीकार योग्य नहीं है। यदि इसे स्वीकार किया जाता है, तो सरकारी भूमि प्राप्त करने वाली संस्था अपनी मनमर्जी चलाएगी, तो सरकार को मूकदर्शक बनकर रहना होगा।

इस संदर्भ में आईडीपीएल को वर्ष 1994 में आवंटित 891.38 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर टीजीआईआईसी को सौंपने के लिए 27 जनवरी, 2008 को ज़िलाधीश द्वारा जारी आदेश को वापस लेने के लिए बीआईएफआर द्वारा 6 फरवरी, 2008 को जारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की घोषणा की। इसके साथ ही इस मामले पर पूर्ण विवरण के साथ प्रतियाचिका दायर करने के लिए केंद्र सरकार आईडीपीएल को आदेश देते हुए न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 22 जून तक स्थगित कर दी।

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