स्लिम रहना है तो बचपन से ही इसकी शुरुआत करें

हमारा कोई न कोई दोस्त फीमेल या मेल ऐसा होता है, जो कॉलेज लाइफ में भी उतना ही फिट दिखता है, जितना अब दादा या दादी बनने के बाद भी दिखता है। बेहद संतुलित फिज़ीक। लेकिन आपको याद होगा कि किसी भी पार्टी में या बाहर खाने के दौरान वह नपा-तुला ही खाता है और एक आप हैं कि आपका वजन घटता-बढ़ता रहता है। आपने अपने बढ़े हुए पेट को कम करने के लिए कभी सोचा ही नहीं है। खाने के आप शौकीन हैं, ऐसे में आप अकसर अपने दोस्त को देखकर परेशान होते हैं कि वह इतना स्लिम-ट्रिम कैसे है? हेल्थ और वजन घटाने वाले विज्ञापन आपको बताते हैं कि कौन-सी ऐसी चीजें हैं, जिन्हें आप अपने बच्चों को शुरुआती जीवन में बता सकते हैं और बच्चे स्वस्थ और हेल्दी रह सकते हैं।

स्कूल में

बच्चों को खाने में परहेज बरतने की बजाय हम उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा खिलाने में यकीन करते हैं, जबकि स्कूल में क्लास के अंदर दिनभर बैठने, ट्यूशन या हॉबी क्लास में जाने के कारण वे अपने लिए एक्सरसाइज का समय नहीं निकाल पाते। स्कूल गोइंग बच्चों को अपने वजन पर नियंत्रण रखना ज़रूरी है। उन्हें स्कूल की स्पोर्ट्स क्लास को ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करें ताकि वे खेलों में भाग लेकर स्वस्थ रह सकें। फिट रहने के लिए वे शारीरिक गतिविधियों में भाग ले सकें। विभिन्न अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि बचपन से ही जो बच्चे खेलने-कूदने की गतिविधियों में भाग लेते हैं, वे बड़े होकर स्वस्थ और फिट वयस्क बनते हैं।

कॉलेज लाइफ

टीन एज में मुहांसे और मूड बदलाव जैसी समस्याएं होती हैं, हार्मोन्स में बदलाव बॉडी मास, डेंसिटी और वसा में बदलाव लाता है। यदि उनका मूड खराब हो तो हम उन्हें खाने के लिए आइपीम, चॉकलेट जैसी चीजें देते हैं। इसकी बजाय उन्हें घर से बाहर निकलकर ऐक्टिव रहने, लगातार कई घंटे टीवी देखने की बजाय छुट्टी वाले दिन उन्हें स्पोर्ट्स की गतिविधियों के लिए मोटीवेट करें। उन्हें योगा क्लास ज्वाइन करवायें। जो पैरेंट्स खुद भी ऐक्टिव रहते हैं, वे अपने बच्चों को भी ऐक्टिव रखकर स्वस्थ भोजन की आदतें विकसित करते हैं।

ऑफिस में

कॉलेज के बाद अपने कॅरियर में सेटल होने वाले अधिकांश लोग पूरा दिन डेस्क पर बैठने का काम करते हैं। काम करने के लंबे घंटे और दबाव के बावजूद यदि अच्छी नींद और सही डाइट ली जाए तो वजन नियंत्रण में रहता है। लेकिन जो लोग बाहर का खाना लगातार खाते हैं, उनके लिए वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। हाँ, सप्ताह में कभी एकाध बार बाहर का खाना खाया जा सकता है, लेकिन अगर आप अपने वजन और फिटनेस को लेकर जागरूक हैं, तो तनावपूर्ण वर्कशैली के बावजूद वर्कआउट के लिए समय निकाल ही लेते हैं।

इसके लिए किसी स्पोर्ट्स गतिविधि या जिम में पसीना बहाकर काम की व्यस्त दिनचर्या में वीकेंड पर वर्कआउट या घूमने-फिरने के लिए जाते हैं, तो आउटिंग भी हो जाती है और पूरे सप्ताह की काम की थकान भी दूर हो जाती है। यदि मीठा कम खाते हैं, समय पर संतुलित भोजन करते हैं, तो आप बीच-बीच में अनहेल्दी स्नैक्स खाने से बचे रहते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन की सैर वजन को नियंत्रित करने में काफी सहायक होती है, जो लोग पूरे सप्ताह ऑफिस जॉब करते हैं, दिनभर बैठने के कारण उनका वजन बढ़ने की आशंका होती है। उनके लिए सुबह और शाम की सैर या वर्कआउट वजन नियंत्रित करने का एक आसान तरीका है।

विवाह के बाद

नव-विवाहित कपल पर हुए विभिन्न शोध इस बात का खुलासा करते हैं कि विवाह के बाद जोड़ों में वजन बढ़ने की समस्या हो जाती हैं। क्योंकि जब वो अच्छे मूड में होते हैं, वे कंफर्ट फूड लेते हैं और लंबे समय तक उनका यही पैटर्न बन जाता है। शादी के बाद दूसरों के घरों में लंच या डिनर करने के दौरान वे भूख और ज़रूरत से ज़्यादा खाते हैं, जिससे वजन बढ़ता है।

इसके अलावा महिलाओं में डिलीवरी के बाद उनका वजन बढ़ जाता है और वो वजन पर नियंत्रण नहीं रखतीं, तो यह वजन ही समस्या हो जाता है, लेकिन जो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हैं, वो महिलाएं डिलीवरी के बाद एक्सरसाइज द्वारा अपने वजन पर नियंत्रण कर लेती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौर में भी अपने वजन को नियंत्रित रखने वाले उपायों से आप मध्य उम्र में भी स्लिम और फिट बने रहते हैं। यदि आपका फ्रेंड सर्कल ऐसा है, जो बेहद हेल्थ कॉशंस हैं, आपको इसका भी लाभ मिलता है।

संध्या सिंह

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