सेप्सिस पर केएलईएफ संकाय और जर्मन वैज्ञानिक का संयुक्त अनुसंधान

हैदराबाद, केएलईएफ डीम्ड यूनिवर्सिटी के रसायन विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. टी. अनुषा जर्मनी के टीयू बर्ग अकादमी फ्रीबर्ग के डॉ. परवानेह रहीमी के साथ एक संयुक्त शोध परियोजना पर काम कर रही हैं, जिसका उद्देश्य सेप्सिस का शीघ्र पता लगाने के लिए उन्नत बायोसेंसर प्रौद्योगिकी विकसित करना है।

डॉ. अनुषा और डॉ. रहीमी ने विकसित किया बायोसेंसर प्रोटोटाइप

सेप्सिस बायोमार्कर के मल्टीप्लेक्स की खोज के लिए इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसिंग प्लेटफॉर्म का विकास शीर्षक से यह परियोजना इंडो-जर्मन विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) पहल के तहत वित्त पोषित है।

यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. टी. अनुषा भारत और जर्मनी के जिस संयुक्त अभियान अनुसंधान अभियान का हिस्सा हैं, उसका लक्ष्य कम लागत वाली पोर्टेबल और तेजी से बायोसेंसर विकसित करना है, जो एक साथ कई सेप्सिस बायोमार्कर का पता लगाने में सक्षम है।

सेप्सिस एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है जो आपके शरीर की किसी संक्रमण के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रिया के कारण होती है। इस नये अनुसंधान के माध्यम से सेप्सिस का प्रारंभिक और सटीक पता लगाना है, ताकि संक्रमण के लिए शरीर की प्रतिक्रिया के कारण होने जीवन को खतरे की स्थिति और घातक परिणामों को कम किया जा सके और आपातकालीन स्थिति में गहन देखभाल की जा सके।

ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा तकनीकी सुधार

अनुसंधान हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला को लाभान्वित करने में सक्षम होगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों और डॉक्टरों को त्वरित और अधिक सटीक नैदानिक उपकरणों तक पहुंच प्राप्त होगी।

परीक्षणों में तकनीकी दक्षता में सुधार किया सकेगा। इसके अलावा परियोजना जैव चिकित्सा उपकरणों पर काम करने वाले स्टार्ट-अप और स्वास्थ्य सेवा उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।

प्रमुख लक्ष्यों में से एक बायोसेंसर का एक कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करना है, जो एक छोटे से रक्त के नमूने से मिनटों के भीतर परिणाम दे सके।

इससे डॉक्टर जल्द ही इलाज शुरू कर सकेंगे और मरीज के बचने की दर बढ़ पाएगी। परियोजना के अंतर्गत डॉ. अनुषा अगस्त 2025 में जर्मनी का दौरा करेंगी। अपने प्रवास के दौरान वह टीयू बर्गा अकादमी फ्रीबर्ग में अनुसंधान टीम का सहयोग करेंगी।

केएलईएफ डीम्ड यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष कोनेरू लक्ष्मण हविश ने संकाय सदस्य डॉ. अनुषा को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

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