कादम्बिनी क्लब गोष्ठी : हरेराम समीप का गजल सत्र

हैदराबाद, कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद के तत्वावधान में गूगल मीट के माध्यम से प्रो. ऋषभदेव शर्मा (हिन्दी परामर्शी दूरस्थ शिक्षा विभाग, मानू) की अध्यक्षता में क्लब की 403वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्ष) एवं प्रवीण प्रणव (महामंत्री) ने बताया कि प्रथम सत्र का आरंभ शुभ्रा महन्तों द्वारा प्रस्तुत निराला रचित सरस्वती वंदना से हुआ। मीना मुथा ने उपस्थित साहित्यकारों का शब्द कुसुमों से स्वागत किया। प्रवीण प्रणव ने कहा कि मुख्य वक्ता हरेराम समीप की लगभग 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह शोधकार्य के लिए भी चर्चित रहे हैं।

हरेराम समीप ने कहा कि प्रो. ऋषभदेव शर्मा और वह ग़ज़ल के सहयात्री हैं। दुष्यंत कुमार निसंदेह अप्रतिम अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। कवि की बुलंदी उसकी स्वीकार्यता से होती है। दुष्यंत कुमार को साहित्यिक संस्कार परिवार से विरासत में मिला। पिता शायर थे, उनकी शायरी से दुष्यंत प्रभावित थे। उनकी गजलों में छंद लय कभी उनसे दूर नहीं हुआ। वह समकालीन उर्दू शायरों में रहे और हिन्दी गजल आंदोलन के युगप्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं।

गजल को सीमित परिभाषा से निकालकर जनचेतना की विधा के रूप में पहचान दिलाने में दुष्यंत कुमार की पहचान रही। आम जन के आत्मसंघर्ष में वह सदैव खड़े रहे। लोकतंत्र को भी सवालों के घेरे में उन्होंने खड़ा किया। उनकी गजलों की किताबें विमर्शो का संकलन है। दुष्यंत जन पक्षधर ही नहीं, युग के प्रवर्तक हैं। प्रदीप भट्ट ने कहा कि इस विषय को संक्षिप्त समय में समेटना असंभव है, फिर भी हरेराम ने श्रोताओं की उत्कंठा को समझा और अपने विचार साझा किए।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने दुष्यंत कुमार की गजल पर समीक्षा दी

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय टीप्पणी में कहा कि गजल विधा पर अध्ययन करने वाले सलाहकार के रूप में हरेराम समीप के कुछ और समीप होने का मौका मिला। दुष्यंत की सटीकता, सारसिकता, विराट प्रतिभा को कम समय में अभिव्यक्त करना संभव नहीं। हरेराम समीप ने गागर में सागर भर दिया। आपातकाल के दौरान दुष्यंत सतर्क हुए। गजल को केंद्रीय महत्व देने का काम दुष्यंत कुमार ने किया। वह रीति सिद्ध कवि हैं और उनकी गजलें नवनीत। उन्होंने गजल के सारे परिदृश्य को बदलकर रख दिया। गजल पर रूमानी का ठप्पा लगा हुआ था, दुष्यंत ने उसे बदलकर पीड़ा और जनआक्रोश के लिए उठाया और परिवर्तन की राह चुनी। जब तक मनुष्य है, उनकी कविता प्रासंगिक है।

प्रवीण प्रणव ने सत्र का धन्यवाद देते हुए कहा कि आगामी 15 मार्च को साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया हैदराबाद चैप्टर, कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में होटल अबोड (लकड़ी का पुल) में सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे तक रूबरू कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें डॉ. अहिल्या मिश्र स्मृति सम्मान से हिन्दी सेवी अहिन्दी भाषी महिला साहित्यकार को सम्मानित किया जाएगा।

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सृजनात्मक, अनुवाद एवं संगीत क्षेत्रों के लेखक एवं कवियों को नवाजा जाएगा

साथ ही सिया सहचरी काव्य सम्मान, महासहस्त्रावधानी डॉ. गरिकिपाटि नरसिम्हा राव तेलुगु अनुवादक पुरस्कार, महासहस्त्रावधानी डॉ. गरिकिपाटि नरसिम्हा राव हिन्दी अनुवादक पुरस्कार, शांति अग्रवाल कहानी/उपन्यास लेखन पुरस्कार, श्री आचार्य कृष्णदत्त हिन्दी साहित्य व्यंग्य/लघुकथा लेखन पुरस्कार, चंपाई माधव कदम हिन्दी लेखन पुरस्कार, राम किशोरी स्मृति सम्मान, सृजनात्मक तकनीक हिन्दी सम्मान, शुभ्रा मोहंतो संगीत साधना पुरस्कार एवं कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद साहित्य गौरव सम्मान से विभिन्न साहित्यिक विधाओं में लेखन कर रहे है साहित्यकारों, मनिषियों को नवाजा जाएगा।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम और बहुभाषी कवि गोष्ठी का आयोजन होगा। उन्होंने सभी से कार्यक्रम में जुड़ने का अनुरोध किया। द्वितीय सत्र में प्रदीप भट्ट की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें हरेराम समीप, प्रो. ऋषभदेव शर्मा, रक्षा मेहता, प्रियंका वाजपेई, तृप्ति मिश्रा, सुषमा त्रिपाठी, भावना पुरोहित, चंद्रप्रकाश दायमा, सुनीता लुल्ला, ऊषा शर्मा, निशी कुमारी, विजय प्रशांत, किरण कुमारी (झारखंड), दर्शन सिंह, मेघा झा, डॉ. सुषमा देवी, तरुणा शर्मा, डॉ. स्वाति गुप्ता, प्रवीण प्रणव, आशा मिश्र, मीना मुथा, हर्षलता दुधोड़िया, शोभा पांडे व अन्य ने काव्य पाठ किया।

सत्यनारायण काकड़ा, शशि राय, मोनिका, श्रुतिकान्त भारती, शेखर त्रिपाठी, रवि वैद, सरिता दीक्षित, डॉ. राशि सिन्हा, शिल्पी भटनागर, सुखमोहन अग्रवाल, मधु भटनागर की उपस्थिति रही। डॉ. अहिल्या मिश्र की अंतिम काव्य रचना का पाठ डॉ. आशा मिश्र मुक्ता ने किया। प्रदीप भट्ट ने अध्यक्षीय टिप्पणी की। मीना मुथा ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रवीण प्रणव ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। डॉ. आशा मिश्रा मुक्ता (कोषाध्यक्ष) ने सभी का आभार जताया।

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