भगवान महावीर ने दिया अहिंसा, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह का मंत्र : भाग्यरत्नविजयजी
हैदराबाद, भगवान महावीर ने विश्व को सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के मूल मंत्र दिए। साथ ही जीओ और जीने दो से वसुधैव कुटुम्बकं के भाव से दुनिया को जागरूक किया।
उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर भवन में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में भाग्यरत्नविजयजी म.सा. ने व्यक्त किये। पूज्यश्री ने कहा कि सनातन काल से देश अहिंसा का उपासक रहा है, लेकिन कत्लखानों और भ्रूण हत्याओं की निरंतर बढ़ती संख्या ने हमारे सामने आज कई अनुत्तरित प्रश्न खड़े कर दिये हैं।
म.सा. ने कहा कि इस देश में सजीव ही नहीं, निर्जीव पदार्थों को भगवान का स्वरूप मानने की परंपरा रही है। कण-कण में भगवान की अवधारणा हमारी संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ रही हैं। भगवान महावीर भगवान बुद्ध और अहिंसा के पुजारी ने हिंसा बंद करवाने के लिए भरसक प्रयास किया। भगवान महावीर ने मानव को जीने की सही राह बताई। भगवान ने जीवन पर कल्याण हेतु न्यौछावर कर दिया।
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