एलपीजी संकट से जंगलों पर खतरा, बढ़ी कटाई

वरंगल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कुकिंग गैस सिलेंडरों की कमी और कीमती सागौन व नीम के पेड़ों की संगठित तस्करी के चलते पुराने वरंगल ज़िले के कुछ हिस्सों में जंगल कटने की दर में खतरनाक वृद्धि हुई है। बताया जाता है कि जैसे-जैसे ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, महबूबाबाद, मुलुगु और जयशंकर भूपालपल्ली ज़िलों में जंगलों के किनारे रहने वाले लोग तेज़ी से जलाने वाली लकड़ी का इस्तेमाल करने लगे हैं।
यह पहले सिर्फ़ गुज़ारा करने का एक तरीका थी, लेकिन अब यह तेज़ी से एक मुनाफे का गैर-कानूनी धंधा बन गई है। आस-पास के कस्बों में हॉस्टल, होटल और टिफ़िन सेंटरों को लकड़ी सप्लाई करने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। इस स्थिति का फ़ायदा संगठित लकड़ी माफिया भी उठा रहे हैं, जो ईंधन की कमी को आड़ में कीमती लकड़ी की तस्करी तेज़ कर रहे हैं।
हाल के हफ़्तों में कई गिरोह बड़े मुनाफ़े के लिए सागौन, नीम, बबूल और इमली जैसे कई तरह के पेड़ काट रहे हैं। इन गतिविधियों का पैमाना तब सामने आया जब मुलुगु ज़िले में वन अधिकारियों ने कोडिसेला वन चेक पोस्ट पर एक बोलेरो गाड़ी को रोका। वन रेंज अधिकारी कोटा सत्तैया के नेतृत्व में एक टीम ने लगभग 2.3 लाख की कीमत के सागौन के लड्ढे ज़ब्त किए और एक संदिग्ध को गिरफ़्तार किया।
परकाल और दोर्णाकल डिवीजनों के निवासियों ने आरोप लगाया कि यह गैर-कानूनी धंधा स्थानीय अधिकारियों की नाक के नीचे फल-फूल रहा है और तस्कर सार्वजनिक सड़कों के किनारे पेड़ काटने के लिए मशीनी कटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक तरफ़ सरकार बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने के अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ़ पहले से मौजूद घने जंगलों को तबाह किया जा रहा है।
जंगलों में अवैध कटाई की घटनाएं तेज
वन विभाग और नगर निगम अधिकारियों के ख़िलाफ़ जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। आरोप हैं कि ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी अपने दफ़्तरों तक ही सीमित रहते हैं और लकड़ी की ढुलाई की इजाज़त देने के लिए रिश्वत लेते हैं।
परकाल के नगर आयुक्त एस. अंजैया ने कहा कि पेड़ों की रक्षा करना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि बहुत ज़रूरी हालात में भी निजी रिहायशी जगहों से पेड़ हटाने के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। नगर निगम की सीमा के भीतर किसी भी नियम-उल्लंघन की सूचना पुलिस को दी जाएगी और उसके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
बढ़ती चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए पालिमेला रेंज अधिकारी नागराजू ने बताया कि सागौन के व्यापार में शामिल एक विशेष गिरोह की पहचान कर ली गई है। उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारी गश्त तेज़ कर रहे हैं और इस काम में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी मामले दर्ज किए जाएंगे। हालांकि सामुदायिक नेता और पर्यावरण समूह और भी ज़्यादा लगातार और ठोस उपायों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तस्करी के नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई किए बिना और स्थानीय ईंधन संकट का समाधान किए बिना राज्य के पहले से ही घटते हुए वन संसाधन गंभीर खतरे में बने रहेंगे।
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