JLF 2026 में यतीन्द्र मिश्र को महाकवि सेठिया कविता पुरस्कार
जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के दौरान कविता और साहित्य को समर्पित प्रतिष्ठित महाकवि कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार के 11वें संस्करण से इस वर्ष प्रख्यात हिंदी कवि, जीवनीकार और सांस्कृतिक विद्वान यतींद्र मिश्र को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषाओं में कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है।
यह सम्मान महाकवि कन्हैयालाल सेठिया फाउंडेशन और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संयुक्त तत्वावधान में प्रदान किया जाता है। पुरस्कार स्वरूप विजेता को प्रशस्ति पत्र, शॉल और एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। इस पुरस्कार का उद्देश्य दिवंगत महाकवि कन्हैयालाल सेठिया की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाना और कविता के क्षेत्र में उत्कृष्ट रचनात्मक योगदान को सम्मानित करना है।
जूरी ने सर्वसम्मति से चुना यतींद्र मिश्र का नाम
इस वर्ष पुरस्कार के लिए गठित जूरी में नमिता गोखले, संजय के. रॉय, सुकृता पॉल कुमार, रंजीत होसकोटे, सिद्धार्थ सेठिया और जयप्रकाश सेठिया शामिल थे। जूरी ने यतींद्र मिश्र के समग्र साहित्यिक योगदान, उनकी काव्य संवेदना और भारतीय कला-संस्कृति की गहरी समझ को ध्यान में रखते हुए सर्वसम्मति से उन्हें इस सम्मान के लिए चुना। उल्लेखनीय है कि इससे पहले यह पुरस्कार अरुंधति सुब्रमण्यम (2024) और बद्री नारायण (2025) जैसे प्रतिष्ठित रचनाकारों को प्रदान किया जा चुका है।

कविता, स्मृति और सांस्कृतिक चेतना के रचनाकार
यतींद्र मिश्र हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा रचनाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने कविता के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत पर गहन लेखन किया है। उनके प्रमुख कविता संग्रहों में ‘यदा कदा’, ‘विभास’ और वर्ष 2024 में प्रकाशित ‘बिना कालिंग विजय के’ शामिल हैं, जिनमें स्मृति, विरह और सांस्कृतिक चेतना के स्वर प्रमुखता से उभरते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध गायिका पर लिखी जीवनी ‘लता: सुर गाथा’ के माध्यम से विशेष पहचान बनाई, जिसे 2017 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (स्वर्ण कमल) और मामी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उनकी चर्चित कृति ‘गुलज़ार साहब: हज़ार राहें मुड़ के देखीं’ सिनेमा और कविता में गुलज़ार के योगदान का संवेदनशील दस्तावेज मानी जाती है।
वर्ष 2022 में यतींद्र मिश्र ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जूरी की अध्यक्षता करने वाले पहले हिंदी कवि बने।
नई पुस्तक का विमोचन भी रहा आकर्षण
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान यतींद्र मिश्र की नई पुस्तक ‘पंख दिए आकाश न दोगे’ का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर वैशाली माथुर और संजीव मिश्र भी मंच पर मौजूद रहे। पुस्तक विमोचन साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
महाकवि कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार के पूर्व विजेताओं में अरुंधति सुब्रमण्यम (2024) और बद्री नारायण (2025) जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। यतीन्द्र मिश्र को यह सम्मान मिलना हिंदी कविता की समकालीन यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
महाकवि कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार के इस सम्मान के साथ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 ने एक बार फिर कविता, विचार और सांस्कृतिक संवाद के मंच के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और सशक्त किया।
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