मोबाइल फुल सिग्नल, रिश्ते जीरो : मुनि दीपकुमारजी
हैदराबाद, हिमायतनगर स्थित प्रशंसा अतिथि गृह में विराजित मुनि दीपकुमारजी आदि ठाणा-2 के सान्निध्य में पास रहकर भी पराए क्यों विषयक विशेष प्रवचन का आयोजन तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद द्वारा किया गया। मुनि दीपकुमारजी ने कहा कि आज का युग कनेक्टिविटी का है। मोबाइल में नेटवर्क फुल है, लेकिन रिश्तों में सिग्नल डाउन है। एक ही घर में रहते हैं, पर दिलों के बीच दीवारें खड़ी हैं। पहले लोग दूर रहते भी थे, तो दिल से करीब थे, आज लोग पास रहते हैं, पर दिल से दूर हो गए हैं। पास रहकर भी पराए क्यों हो जाते हैं। यह केवल सामाजिक समस्या नहीं, विकट स्थिति है।
आज हर गली, हर समाज में एक अदृश्य दीवार खड़ी हो गई है। बात बंद, मिलना बंद, दिलों का जुड़ना बंद। यदि सबके दिल जुड़ जाएँ, तो समाज एक बन जाता है। मुनिश्री ने कहा कि उठो, जुड़ो और इतिहास बना दो। अगर दूरी है, तो आज अभी खत्म कर दो, किसी से नाराजगी है, अभी क्षमा कर दो। क्योंकि वक्त नहीं रुकेगा, मौका बार-बार नहीं मिलेगा।
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मुनि काव्यकुमारजी ने कहा कि मानव इतिहास के इस अनूठे कालखंड में हम एक विचित्र विरोधाभास के साक्षी हैं। एक ओर हमने ग्लोबल विलेज की परिकल्पना को साकार करते हुए सात समंदर पार बैठे व्यक्ति से पलक झपकते ही जुड़ने की शक्ति पा ली है, लेकिन विडंबना देखिए एक ही छत के नीचे दो व्यक्तियों के बीच मिलन की खामोशी पसरी हुई है। पास रहकर भी पराया होना केवल एक पंक्ति नहीं, अपितु 21वीं सदी के रिश्तों का सबसे बड़ा कड़वा सच है।
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