भाषा-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास एवं रोज़गार की संभावनाओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
हैदराबाद, भाषा-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास एवं रोज़गार की संभावनाओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्वयं के पोर्टल पर यूजीसी-शैक्षिक संचार संकाय, नई दिल्ली तथा हिन्दी विभाग, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, पुडुचेरी द्वारा संचालित भाषा-प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम के अंतर्गत भाषा-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास एवं रोज़गार की संभावनाओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सी. जयशंकर बाबू ने बताया कि भाषा-प्रौद्योगिकी अत्यंत तीव्र गति से विकसित हो रही है। अत इससे संबंधित कौशलों के विकास रोज़गार के अवसरों को निश्चय ही बढ़ा सकता है। आज वृहद भाषिक मॉडलों के विकास के परिणाम स्वरूप प्रजनक वृद्धिमान बुद्धि की क्षमता के विकास को जो देख पाएँ हैं।
भाषाविज्ञान और प्रौद्योगिकी: हरियाणवी, पंजाबी, उर्दू
जिसका विकास और विस्तार सभी भारतीय भाषाओं के लिए करने की दिशा में प्रयासों से निश्चय ही कई रोज़गार विकसित होने की संभावना है। हमें अपनी भाषाओं के डिजिटल विकास की दृष्टि से योगदान के लिए सक्रिय होने की आवश्यकता है। इस आभासी संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षार्थियों, प्रपत्र प्रस्तोताओं के अलावा पाठ्यक्रम में सुदूर दक्षिण अमेरिका के सुरीनाम से शामिल शिक्षार्थी संद्रा लोटवान सहित कई विद्वान उपस्थित थे।
संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. सी. जय शंकर बाबू ने की, जिसमें पाँच विद्वानों ने शोध आलेख प्रस्तुत किये। मनजीत सिंह, सहायक प्राध्यापक उर्दू, कला एवं भाषा संकाय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र ने हरियाणवी, पंजाबी और उर्दू में भाषाविज्ञान पर शोध : प्रौद्योगिकी की भूमिका विषय पर पेंद्रित शोध आलेख के अंतर्गत पंजाबी, हरियाणवी और उर्दू भाषाओं की समफद्धता के संबंध में स्पष्ट करते हुए इनके लिए प्रयुक्त लिपियों के बारें में विस्तफत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि पंजाब में पंजाबी भाषा के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग लिपियों का प्रयोग हो रहा है। एक प्रांत में गुरुमुखी और दूसरे प्रांत में शाहमुखी। हरियाणवी भी देवनागरी के अलावा फारसी लिपि में लिखी जा रही है। उर्दू फारसी लिपि में प्रयुक्त हो रही है। पंजाब और हरियाणा प्रांतों में प्रचलित इन तीनों भाषाओं और इनकी लिपियों की विशिष्टताओं के कई आयामों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृति के पोषण में इनके योगदान को रेखांकित किया।
मशीनी अनुवाद और भाषा-प्रौद्योगिकी पर शोध प्रस्तुति
इन तीनों भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए प्रौद्योगिकी के महत्व की चर्चा की। भारतीय रिज़र्व बैंक के देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय में सहायक प्रबंधक-राजभाषा के पद पर सेवारत राजेश कुमार, जो बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य-प्रदेश के हिन्दी विभाग के शोधार्थी हैं, ने राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन में मशीनी अनुवाद की भूमिका विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया जिसमें संवैधानिक प्रावधान, राजभाषा अधनियम एवं नियमों के परिप्रेक्ष्य में राजभाषा नीति के अंतर्गत अधिनियम की धारा-3(3) के अंतर्गत द्विभाषिकता की अनिवार्यता और इसके लिए मशीनी अनुवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला।
साथ ही मशीनी अनुवाद के विभिन्न आयामों की चर्चा सहित विभिन्न मशीनी अनुवाद सुविधाओं पर चर्चा की। डॉ. रौबी फौजदार, शैक्षिक परामर्शदाता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नागपुर ने बहुभाषिक समाज में मशीनी अनुवाद की उपादेयता विषयक शोध आलेख के अंतर्गत अनुवाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मशीनी अनुवाद की गुणवत्ता के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही वर्तमान मशीनी अनुवाद की प्रणालियों का संक्षिप्त आकलन प्रस्तुत किया।
रक्षा मंत्रालय के वैमानिक गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय के अनुवाद अधिकारी उमेश कुमार प्रजापति ने कंप्यूटर के भाषिक अनुप्रयोग पर केन्द्रीत अपने शोध पत्र में भाषा के क्रमिक विकास के साथ शब्द संसाधन, लिप्यंतरण, कोश निर्माण, मशीनी अनुवाद या कंप्यूटर साधित अनुवाद, कंप्यूटर साधित भाषा शिक्षण, डेस्कटॉप प्रकाशन, प्राकृतिक भाषा संसाधन आदि बिंदुओं के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला।
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भाषा-प्रौद्योगिकी में रोज़गार के अवसरों पर संगोष्ठी
साधन शाही, स्नातकोत्तर शिक्षिका, उच्च माध्यमिक विद्यालय, वाराणसी ने भाषा-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाएँ विषयक शोध पत्र के अंतर्गत भाषा-प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल, ज्ञान और कुशलता हासिल करने के विभिन्न स्रोत आदि बिंदुओं पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता उमेश कुमार प्रजापति, रक्षा मंत्रालय के वैमानिक गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय के अनुवाद अधिकारी ने की।
इस सत्र में पांडिचेरी विश्वविद्यालय, पुडुचेरी की छात्रा धनलक्ष्मी ने कंप्यूटर के विकास विभिन्न आयामों पर प्रपत्र प्रस्तुत किया। सविता मन्नासे, शोधार्थी, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश ने भाषा-प्रौद्योगिकी : कुशलता विकास एवं रोज़गार के अवसर विषय के अपने प्रपत्र में भाषा-प्रौद्योगिकी के माध्यम से सफजित होते रोज़गार के नए-नए अवसरों के बारे में विश्लेषण प्रस्तुत किया।
सत्रों का संचलन शाइना शबनम, शोधार्थी, हिन्दी विभाग, महाराज सूरजमल ब्रिज विश्वविद्यालय, भरतपुर ने किया। संगोष्ठी का संयोजन पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष तथा स्वयं भाषा-प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. सी. जय शंकर बाबू ने किया। दोनों तकनीकी सत्रों के अंत में प्रश्नोत्तर सत्रों का आयोजन किया गया।
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