एल.बी. नगर-हयात नगर डबल डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रक्रिया तेज़

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हैदराबाद, एल.बी. नगर से हयात नगर ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन तक प्रस्तावित 7.1 किमी डबल डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से हयात नगर एवं एल.बी. नगर के अलावा यहाँ से गुज़रने वाले लाखों लोगों को यातायात जाम से राहत मिल सकती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मंत्री कोमटीरेड्डी वेंकट रेड्डी इस कार्य को तेज़ी से पूरा करना चाहते हैं। वह इसके लिए अगले सप्ताह केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर परियोजना के कार्यों में तेज़ी लाने का अनुरोध करेंगे।

सड़क एवं भवन निर्माण मंत्री कोमटीरेड्डी वेंकट रेड्डी ने एल.बी. नगर से हयात नगर डबल डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की प्रगति पर आज सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आधिकारियों के साथ चर्चा की। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीनिवास राजू, आरएंडबी के विशेष मुख्य सचिव विकास राज, केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी कृष्ण प्रसाद, एचएमआरएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक आनंद मोहन, आरएंडबी के मुख्य अभियंता धर्मा रेड्डी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री ने कहा कि लगभग 941 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित डबल डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए राज्य के हिस्से के रूप में 200 करोड़ रुपये देने के लिए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पहले ही सहमति व्यक्त की है। नागपुर के बाद यह देश में दूसरा बड़ा डबल डेकर फ्लाईओवर होगा। इस परियोजना के पूरा होने पर एल.बी. नगर और हयात नगर क्षेत्र की 54 कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 20 लाख लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और हैदराबाद से विजयवाड़ा मार्ग पर यात्रा करने वाले लाखों लोग 15 मिनट के भीतर शहर पार कर सकेंगे।

एनएच-65 पर भारी ट्रैफिक से रोज हो रहीं दुर्घटनाएँ

मंत्री ने बताया कि एनएच 65 मार्ग पर एल.बी. नगर से हयात नगर तक भारी यातायात रहता है। सड़क पार करते समय रोज दुर्घटनाएँ होती हैं। इस डबल डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने पर आसपास की कॉलोनियों के निवासी नीचे सर्विस रोड के माध्यम से आसानी से सड़क पार कर सकेंगे और यातायात समस्या दूर होंगी। इसके लिए जल्द से जल्द स्वीकृति लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी करने हेतु केंद्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

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केंद्रीय अधिकारी कृष्ण प्रसाद ने बताया कि इस परियोजना को पहले ही वार्षिक योजना में शामिल किया जा चुका है। बैठक में सर्विस रोड, बीच में राष्ट्रीय राजमार्ग और ऊपर मेट्रो रेल निर्माण को ध्यान में रखते हुए पिल्लर फाउंडेशन, स्ट्रक्चर और मेट्रो स्टेशनों जैसे तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई। मंत्री ने सुझाव दिया कि यदि एक ही वर्क एजेंसी निर्माण कार्य संभाले तो समन्वय की समस्या नहीं होगी और कार्य तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

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