रामचंदर राव रिमोट कंट्रोल प्रेसिडेंट : राजा सिंह
हैदराबाद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में रामचंदर राव के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद 3 बार के विधायक राजा सिंह के बगावती तेवरों में किसी भी तरह की नरमी नहीं आयी। आज एक ओर जहाँ रामचंदर राव की ताजपोशी हो रही थी, वहीं दूसरी ओर राजा सिंह रामचंदर राव समेत प्रदेश नेतृत्व पर हमलावर थे। कुछ मीडिया चैनलों से बातचीत करते हुए विधायक टी. राजा सिंह ने कहा कि भारी मन से उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दिया। वह प्रदेश में भाजपा के सत्तासीन होने की उम्मीद जता रहे थे, लेकिन पार्टी के फैसले से जोश से भरे कार्यकर्ताओं को निराश कर दिया।
राजा सिंह ने कहा कि राज्य में पार्टी के 8 सांसद, 8 विधायक, 3 विधान परिषद सदस्य हैं, वे इनमें से ही अध्यक्ष बनने की संभावना जता रहे थे। उन्होंने रामचंदर राव को अपना पुराना दोस्त कहते हुए बताया कि राव आक्रमक नहीं हैं, वह आक्रमक शैली में ठीक तरह से बोल नहीं पाते। वह बूथ स्तर पर पैदल चलने में भी कठिनाइयों का सामना करेंगे, जिससे कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि वह (राजा सिंह) तीन बार के विधायक हैं। वर्ष 2018 में राज्य से एक मात्र विधायक बने तथा वर्ष 2023 में जीएचएमसी क्षेत्र में पार्टी के एकमात्र विजयी विधायक हैं।
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रिमोट कंट्रोल नेतृत्व पर राजा सिंह का हमला
नामांकन के संबंध में पूछे गए प्रश्न के जवाब में राजा सिंह ने बताया कि पार्टी द्वारा नेताओं को नामांकन से रोका जा रहा था, जिसके बाद ही वह नामांकन करने पहुँचे। उन्होंने कहा कि पार्टी के चुनाव अधिकारी ने नामांकन पत्र देने में देरी की और 10 काउंसिल सदस्यों के हस्ताक्षर के नाम पर समर्थन करने वाले नेताओं को डराने लगे। उन्होंने कहा कि पार्टी को रिमोट कंट्रोल से चलने वाला अध्यक्ष चाहिए था, ऐसा अध्यक्ष जो इनके इशारों पर चले। उन्होंने बताया कि हजारों कार्यकर्ता हिन्दुत्व व विकास के बल पर राज्य में सरकार बनने का सपना देख रहे थे, आज उन सभी का मनोबल टूट गया।
राजा सिंह ने कहा कि वह पार्टी से निकलेंगे, सपने में भी नहीं सोचा था, लेकिन हिन्दुत्व के आगे किसी भी तरह का समझौता अस्वीकार्य है। उन्होंने प्रदेश भाजपा के कांग्रेस-बीआरएस के जाल में फँसने का आरोप लगाते हुए कहा कि पीठ पीछे समझौते की वजह से पार्टी को नुकसान हो रहा है। भविष्य में बीआरएस या कांग्रेस में शामिल होने के बारे में पूछने पर विधायक ने स्पष्ट कहा कि वह हिन्दू विरोधी पार्टियाँ हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचारक के रूप में काम करते रहेंगे।
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