मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति रेवंत को मिली

हैदराबाद, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को मंत्रिमंडल के विस्तार की अनुमति मिल गयी है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचने के बाद रेवंत ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से इस बारे में चर्चा की और विस्तार पर सहमति बन गयी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उगादी के अवसर पर चार नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कोर कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी भी थे।

सुरंग राहत अभियान पर विशेष अधिकारी नियुक्त

दूसरी ओर दिल्ली रवाना होने से पहले रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को एसएलबीसी दुर्घटना में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए आवश्यक बचाव अभियान जारी रखने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की मुख्य सचिव को राहत कार्यों की लगातार निगरानी के लिए आईएएस अधिकारी शिव शंकर को विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने सोमवार दोपहर विधानसभा कमेटी हॉल में एसएलबीसी सुरंग में हुए हादसे के बाद वहां पर जारी बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव, राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, सरकार की मुख्य सचिव शांति कुमारी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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आपदा राहत कार्यों की प्रगति और चुनौतियों पर जानकारी

बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन के विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार और कर्नल परीक्षित मेहरा ने मुख्यमंत्री को पिछले एक महीने से दुर्घटना स्थल पर चले राहत कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों के साथ-साथ निजी संगठनों सहित 25 एजेंसियां राहत कार्यों में भाग ले रही हैं। राहत कार्यों में कुल 700 कर्मी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे सुरंग में ढही चट्टानों और टीबीएम के भागों कटिंग करके बाहर ला रहे हैं। सुरंग से समय-समय पर जमा हुई मिट्टी, चट्टानों के ढेर, गाद और झरने के पानी को भी हटाया जा रहा हैं।

इस अवसर पर अधिकारियों ने दुर्घटना के दिन और वर्तमान स्थिति की तस्वीरें दिखाते हुए एक पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि खराब हवा और कम रोशनी के कारण बचाव कार्य जटिल हो रहा है, क्योंकि दुर्घटना सुरंग के प्रवेश द्वार से 14 किलोमीटर भीतर हुई है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना स्थल के 30 मीटर क्षेत्र को सबसे खतरनाक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। उन्होंने राय व्यक्त की कि जीएसआई और एनजीआरआई द्वारा किये गये वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर वहां बचाव अभियान चलाया जाना चाहिए।

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