रेवंत ने पीएम मोदी से किया परिसीमन पर राष्ट्रीय सहमति बनाने का आग्रह
हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्कोर मोदी एक खुला पत्र लिखकर लोकसभा सीटों में वृद्धि के मुद्दे पर एक हाइब्रिड मॉडल के साथ राष्ट्रीय, राजनीतिक सहमति बनाने और विधायी सीटों की संख्या में वृद्धि से जोड़े बिना महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकसभा सीटों में वृद्धि—ये तीनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें एक-दूसरे से जुड़ा हुआ नहीं माना जाना चाहिए। रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस पार्टी की 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में वर्तमान 543 सीटों के भीतर ही इसे लागू करने की वकालत की।
जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए रेवंत रेड्डी ने चेतावनी दी कि इससे संघीय संतुलन बिगड़ सकता है और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने उल्लेख किया कि तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों ने जनसंख्या स्थिरता, आर्थिक विकास और मानव विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ये दक्षिणी राज्य राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान देने के बावजूद संसाधनों के वितरण में पहले से ही वित्तीय असमानताओं का सामना कर रहे हैं और यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो उन्हें और अधिक राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
वैकल्पिक रूप में, मुख्यमंत्री ने “हाइब्रिड मॉडल” का सुझाव दिया, जिसमें अतिरिक्त सीटों का एक हिस्सा जनसंख्या के आधार पर और शेष सीटें आर्थिक योगदान तथा विकास सूचकांकों—जैसे सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP)—के आधार पर आवंटित की जाएँ। उन्होंने तर्क दिया कि यह तरीका प्रगतिशील राज्यों को दंडित किए बिना न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की पीएम से अपील
रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि पूर्व की सरकारों ने राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और क्षेत्रीय असंतुलन को रोकने के लिए परिसीमन को टाल दिया था। उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान में इस विषय पर कोई भी निर्णय सावधानीपूर्वक और सहमति के आधार पर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को “समानता, न्याय और राष्ट्रीय अखंडता” का प्रश्न बताते हुए प्रधानमंत्री से इस विषय पर पारदर्शी और समावेशी चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण प्रभाव वाले निर्णय राज्यों के बीच एकता को बढ़ावा देने वाले होने चाहिए और सभी क्षेत्रों की आकांक्षाओं को समाहित करने वाले होने चाहिए, न कि विभाजन पैदा करने वाले। रेवंत रेड्डी ने इस संबंध में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों को भी अलग-अलग पत्र लिखकर उनका समर्थन मांगा।
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