दक्षिण समाचार पाक्षिक पत्रिका के संस्थापक श्रीमुनींद्र श्रीवास्तव

साहित्य और पत्रकारिता के विराट पुरुष स्वर्गीय मुनींद्र से पहला परिचय स्वर्गीय तेजराज जैन के माध्यम से आनंद ऋषि साहित्य सम्मान समिति के माध्यम से हुआ। यह बैठक मुनींद्र के घर पर थी। बिना किसी औपचारिकता के उनसे भेंट हुई। उनमें आतिथ्य भावना कूट-कूट कर भरी थी। वे जीवन और जिजीविषा के प्रतीक थे। फक्कड़ स्वभावी मुनींद्र गांधी, खादी और हिन्दी के प्रबल समर्थक थे। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों में उनकी गहरी आस्था थी।
मैंने उनकी बातों को ध्यान से सुना। वह बता रहे थे- हमारी संस्कृति में व्यक्ति किसी कल-कारखाने का पुर्ज़ा मात्र नहीं है। वह खुद एक बड़ा कारखाना है। वह प्रकाश की एक किरण है। वह किसी चित्र की अस्पष्ट रेखा नहीं बल्कि स्वयं संपूर्ण चित्र है। हम उनको सुन रहे थे। आज भी मेरे मस्तिष्क में उनका कहा एक-एक शब्द विराजमान है। वह हिन्दी के कट्टर पक्षधर थे। गंभीर साहित्यिक लेखों, आलोचनाओं तथा समीक्षाओं का सर्वग्राही ढंग से अवलोकन करते थे।
दक्षिण भारत में हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा
प्राय साहित्यकार और पत्रकार के बीच अदृश्य विभाजक रेखा देखी जाती है, लेकिन मुनींद्र इससे अलग थे। वह आलेखों के चयन में सृजनात्मकता और भाषिक क्षमता को महत्व देते थे। उनके विचारों में कोई दुराव नहीं था। उन्होंने दक्षिण समाचार के माध्यम से कई नये पत्रकारीय प्रयोग किए, जिसे पाठकों ने सराहा। बिहार में जन्मे मुनींद्र ने दक्षिण में हिन्दी के लिए, जो कार्य किया, उसकी देशभर में सराहना की गई और इसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। राजनीति के खोते आदर्शों, मूल्यों तथा सिद्धांतों को बेबाक रूप से अपनी पत्रिका के संपादकीय में लिखते थे।

दक्षिण समाचार में लिखे उनके संपादकीय पाठकों द्वारा बड़े चाव से पढ़े जाते थी, क्योंकि उसमें परिस्थितियों पर सारगर्भित तथ्य और बातें हुआ करती थीं। अपने विद्यार्थी जीवन में मुनींद्र स्वतंत्रता सेनानी भी रहे। अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये स्वतंत्रता आंदोलन में कई बार जेल गये। उनकी मान्यता थी कि अंग्रेज़ शासकों को तत्काल देश छोड़ना चाहिए। वह अच्छे साहित्यकार, चिंतक और कर्तव्यनिष्ठ थे। उन्होंने कई नये लेखकों, कवियों और समीक्षकों को अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित किया, जिनमें कई अहिन्दी भाषी रचनाकार भी हैं। उनका प्रत्येक कार्य व्यापक दृष्टि एवं दूर दर्शिता से प्रेरित था।
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