hindi poem on love
-
कविता
शाम की ख़्वाहिशें (कविता)
शाम की ख़्वाहिशों को, कभी तो चैन आये,भटकते मुसाफ़िर को, दहलीज कोई बुलाये।बातों की ज़िद हो ऐसी, कि ख़ामोशी भी…
और पढ़ें »
शाम की ख़्वाहिशों को, कभी तो चैन आये,भटकते मुसाफ़िर को, दहलीज कोई बुलाये।बातों की ज़िद हो ऐसी, कि ख़ामोशी भी…
और पढ़ें »