हैद्रा पर फिर नाराज़ हुआ तेलंगाना हाईकोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना हाईकोर्ट ने अदालत में विचाराधीन भूमि पर स्थित निर्माण को अवैध बताकर ढहाये जाने पर हैद्रा को फटकार लगायी है। हाईकोर्ट ने हैद्रा से सवाल किया कि किस अधिकार से निर्माण हटाया गया। अदालत ने कहा कि हैद्रा को सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार नगर पालिका विभाग के मार्गदर्शन में कार्य करना चाहिए। बिना किसी अनुमति के कानून के विरुद्ध एकतरफा निर्णय नहीं लिया जा सकता।

रंगारेड्डी ज़िले के गंडीपेट मंडल के नारसिंगी में स्थित कई प्लॉट्स की बाउंड्री वॉल को हैद्रा द्वारा तोड़े जाने को चुनौती देते हुए जी. राहुल यादव समेत आठ लोगों ने अदालत में याचिका दायर की थी। इस पर न्यायमूर्ति एन.वी. श्रवण कुमार ने बुधवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति ने निजी व्यक्तियों की प्रहरी दीवार को तोड़ने के बाद लगाई गई फेंसिंग को 46 घंटों के भीतर हटाने का निर्देश दिया, हालांकि वहां हैद्रा द्वारा लगाए गए बोर्ड को यथावत रखने की अनुमति दी गई है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि निचली अदालत ने याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की पुष्टि करते हुए निर्णय दिया था और अधिकारियों की अपील हाईकोर्ट में लंबित है। न्यायिक समीक्षा के दौरान भूमि की प्रहरी दीवार हैद्रा ने अवैध रूप से ढहा दिया और कोई नोटिस भी नहीं दिया गया।

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हैद्रा की ओर से वकील ने जवाब दिया कि जीओ 90 के अनुसार हैद्रा का गठन हुआ है और अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका विभाग से अलग से आदेश लेने की आवश्यकता नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका विभाग के मुख्य सचिव से अनुमति लेना अनिवार्य है। एकतरफा ढहाने की कार्रवाई वैध नहीं है। अदालत ने सुनवाई 24 तारीख तक स्थगित कर दी।

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